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हत्या के बाद घिरी पुलिस, चौकी प्रभारी सस्पेंड

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प्रधान की हत्या के बाद की गई तोड़फोड़ व आग को बुझाते पुलिस कर्मी। - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। ग्राम प्रधान देवशरण यादव की हत्या के मामले में एसएसपी आशीष तिवारी ने बारुन चौकी प्रभारी राम अवतार को निलंबित कर दिया है। जबकि चौकी पर तैनात चार सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
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वहीं पुलिस की लापरवाही को लेकर मंगलवार को भी लोगों में आक्रोश दिखा। इससे तनाव की स्थिति रही। बवाल से बचने के लिए करीब पौने दो घंटे तक रायबरेली मार्ग को सील कर दिया गया था।
इस दौरान पोस्टमार्टम के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच डीएम व एसएसपी जिला अस्पताल से शव लेकर गांव पहुंचे। शव गांव पहुंचते ही भारी संख्या में समर्थक भी पहुंच गए और भूमि विवाद निपटाने के बाद भी अंतिम संस्कार की मांग पर अड़ गए।
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इससे प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए। अधिकारियों की मान-मनौव्वल के बाद भी घरवाले व समर्थक मांगों पर अड़े रहे। देर शाम तक हंगामा चलता रहा और अंतिम संस्कार नहीं हो सका।
मामले में पुलिस सात लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियाें के घरों में आक्रोशित भीड़ ने सोमवार रात आग लगा दी थी। मंगलवार को इन घरों से धुएं के गुबार उठते दिखे। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा रहा।
सोमवार शाम करीब सात बजे इनायतनगर थाने के बारुन मोड़ के पास हल्ले द्वारिकापुर के ग्राम प्रधान देवशरण यादव (48) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
वहीं गोली लगने से घायल अर्जुन व सतीश का लखनऊ में इलाज चल रहा है। प्रधान की हत्या की खबर से आक्रोशित समर्थकों ने आरोपियों के घर हमला बोल दिया था।
घर में आग लगाने के साथ कई वाहन फूंक दिए थे। आग लगने की सूचना पर पहुंची दमकल टीम को भी विरोध के कारण बैरंग लौटना पड़ा था। सूचना पर पहुंची पुलिस भी मूकदर्शक बनी रही।
ग्रामीणों के आक्रोश को भांप अधिकारी किसी को रोकने की हिम्मत नहीं जुटा सके। नतीजा यह रहा कि पुलिस बल के सामने ही कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया। पूरी रात हंगामा चला।
मामले में मृतक प्रधान के दामाद दीपक यादव की तहरीर पर पुलिस ने अमरदीप, रमेश, ईश्वरदत्त, महेश दत्त, रमाकांत, रवि मिश्र व गगन मिश्र के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया है। मामले में पुलिस ने ईश्वरदत्त व गगन को गिरफ्तार किया। जबकि अन्य की तलाश की जा रही है।
उधर, मंगलवार सुबह विरोध के बीच पुलिस किसी तरह शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंची। सुबह जिसको भी वारदात के बारे में जानकारी हुई वह प्रधान के गांव पहुंच गया।
गांव में भारी भीड़ जमा हो गई। लोग शव आने का इंतजार करते रहे। तनाव व आक्रोेश को भांप पुलिस ने रायबरेली हाईवे दोपहर दो बजे से पौने चार बजे तक पूरी तरह सील कर दिया। किसी भी वाहन को आने-जाने की इजाजत नहीं थी।
इस दौरान डीएम अनुज कुमार झा व एसएसपी आशीष तिवारी भारी फोर्स के साथ पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर घर पहुंचे। शव पहुंचते ही लोग अंतिम संस्कार से पहले आरोेपियों से चल रहे भूमि विवाद को निपटाने की मांग अड़ गए।
वहीं गांव में तनाव को देखते हुए एसपी ग्रामीण एसके सिंह, सीओ मिल्कीपुर राजेश राय समेत कई थानों की फोर्स व पीएसी बल को तैनात कर दिया गया है। प्रधान की हत्या के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
पुलिस सतर्क होती तो बच जाती प्रधान की जान
प्रधान की हत्या की वारदात को टाला जा सकता था। पुलिस को बार-बार लिखित और मौखिक जानकारी देने के बाद भी दोनों पक्षों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया।
आक्रोशित परिवारीजन व ग्रामीणों के अनुसार प्रधान व उनके समर्थकों और हत्या आरोपियों के बीच गोली चलने से पहले घर पर मारपीट हुई थी, जिसमें दो लोगों को चोटें भी आईं थीं। मगर पुलिस सब कुछ जानते हुए भी लापरवाह बनी रही। एक दिन पहले भी पुलिस को मामले में संघर्ष होने की जानकारी खुद मृत प्रधान की ओर से दी गई थी। लेकिन पुलिस की लापरवाही से हत्या हो गई।
रास्ते के विवाद में खूनी संघर्ष
प्रधान की हत्या के पीछे सरकारी जमीन की कब्जेदारी ही कारण बनी। बताया गया कि जंगल झाड़ी की जमीन पर अरसे से आरोपी पक्ष का कब्जा था। उसी जमीन से ग्राम प्रधान देवशरण यादव रास्ता निकलवाना चाहते थे।
लगभग चार बीघे की इस सरकारी जमीन पर दोनों पक्षों की नजर थी। जिसको लेकर पहले भी कई बार विवाद हो चुका था। हालांकि लेखपाल राहुल वर्मा ने बताया कि ग्राम प्रधान द्वारा जमीन खाली कराने के लिए कोई प्रार्थना पत्र राजस्व विभाग में नहीं दिया गया था।
वहीं, मृतक ग्राम प्रधान देवशरण यादव व आरोपी हरिभान दत्त मिश्र के बीच लकड़ी के कारोबार को लेकर काफी दिनों से रंजिश थी। कारोबार में आगे बढ़ने को लेकर एक-दूसरे के विरोधी बन गए थे। एसपी ग्रामीण एसके सिंह ने बताया कि जमीन संबंधी विवाद था, पुलिस को क्या पता कि हत्या हो जाएगी।
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