अयोध्या। पितरों का पूजन पितृपक्ष 14 सितंबर से शुरू हो रहा है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक 14 सितंबर से आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा लगने से पितृपक्ष में पितरों का पूजन-तर्पण शुरू होगा।
जिन तिथियों में पितरों-पूर्वजों की मृत्यु हुई हो, यजमानों को उन्हीं तिथियों में अपने पितरों का तर्पण करना चाहिए। शनिवार से सरयू घाटों पर स्नान, दान एवं पितृ विसर्जन शुरू हो जाएगा। इन दिनों घर में प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा, दातून, पान, तेल मालिश, शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। पितृपक्ष 28 सितंबर तक चलेगा।
आचार्य शिवेंद्र बताते हैं कि गरुण पुराण के अनुसार जिन माताओं की मृत्यु की तिथि की जानकारी न हो ,उनका श्राद्ध मातृ नवमी के दिन किया जाना चाहिए।
यदि यज्ञोपवीत के पहले ही किसी की अकाल मृत्यु हो गई हो तो उनका श्राद्ध अष्टमी के दिन किया जाना चाहिए। जिन पितरों की मृत्यु तिथि का कोई ज्ञान न हो उन सभी का श्राद्ध सर्व पितृ विसर्जनी अमावस्या के दिन किया जाना धर्म के अनुसार है।
बताया कि पितृ ऋण चुकाने के लिए लोग हर साल भाद्रपद की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक एक पखवारा श्राद्ध कर्म करते हैं। मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। ये दिन हमारे पूर्वजों को याद करने व उनका श्राद्ध करने के लिए होते हैं।