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कायम की मिसाल, धैर्य व साहस से कोरोना को हराया

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अयोध्या। जंग चाहे जितनी लंबी क्यों न चले, दुश्मन चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि धैर्य, संयम व साहस के हथियार के साथ लड़ने का जज्बा हो तो हर जंग जीती जा सकती है। इस बात को सही साबित किया गया है अयोध्या के 84 वर्षीय प्रख्यात साहित्यकार डॉ.स्वामीनाथ पांडेय व 75 वर्षीय संत समिति अयोध्या के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास रामायणी ने। संक्रमित होने के बाद भी उन्होंने धैर्य नहीं खोया। उम्र की अधिकता लगातार कोरोना से लड़ने में मुश्किलें पैदा करती रहीं लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति से ये डटे रहे। होम आइसोलेशन में रहकर डॉक्टरों द्वारा बताई हर बात का कड़ाई से पालन किया। फिर क्या था संयम व अनुशासन के आगे आखिरकार कोरोना को नतमस्तक होना पड़ा।
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हौंसला बुलंद हो तो किसी भी उम्र में कोरोना को मात दी जा सकती है। ऐसा ही कर दिखाया रामनगरी के प्रसिद्ध साहित्यकार कई भाषाओं के विद्वान, सैकड़ों पुस्तकों के लेखक 84 वर्षीय डॉ. स्वामीनाथ पांडेय ने। उनके भतीजे ओंकारनाथ पांडेय ने बताया कि बाबू जी 27 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हो गए थे। इस दौरान उन्होंने धैर्य रखा। श्रीराम चिकित्सालय के डॉक्टर इंद्रभान विश्वकर्मा के निर्देशन में उनके द्वारा बताए गए इलाज के जरिए होम आइसोलेशन में रहकर बाबू जी की कोरोना से जंग जारी रही। आखिरकार 13 मई को उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई। डॉ.स्वामीनाथ पांडेय ने कोरोना से जंग की कहानी बताते हुए कहा कि विपरीत परिस्थति में सकारात्मक बने रहना सबसे ज्यादा जरूरी है। अपने ऊपर निराशा व हताशा को हावी नहीं होने देना है, यही जीत का मंत्र है।
एक तरफ जहां युवा कोरोना वायरस से डर रहे हैं, परेेशान हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ 75 वर्षीय संत समिति अयोध्या के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास रामायणी ने न केवल कोरोना को मात दी, बल्कि ईश्वर की कृपा से अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं। महंत कन्हैयादास रामायणी 25 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने धैर्य नहीं खोया बल्कि होम आइसोलेशन में रहकर कोरोना से जंग जारी रखी। उनकी 11 मई को दूसरी कोराना रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। अब वह एकदम स्वस्थ भी हैं। महंत कन्हैया दास ने अपना अनुभव बांटते हुए कहा कि यदि लड़ने का जज्बा हो तो जिंदगी की कोई भी जंग जीती जा सकती है। बताया कि उन्होंने डॉक्टरों द्वारा बताए गई हर बात का कड़ाई से न सिर्फ पालन किया बल्कि संयमित दिनचर्या व आहार-विहार के साथ योग-प्राणायाम का भी सहारा लिया, जिसने उनकी जीत में अहम भूमिका निभाई।
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