हाईकोर्ट के निर्देश व संस्कृति विभाग की पहल के बाद यह जिम्मेदारी राज्य संग्रहालय को दी गई है। संग्रहालय में गुमनामी बाबा के सामान, दस्तावेज और उनकी यादों को संजोया जायेगा।
सरकार की इस पहल से अब लगभग तय हो गया है कि फैजाबाद में रोडवेज बस स्टेशन के पास रामभवन में रह रहे गुमनामी बाबा की कथित मौत के बाद उनके आवास से मिले तमाम सामान व दस्तावेज जो नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन रहस्यों से सीधा सरोकार रखते हैं।
अब वह संरक्षित तो कर ही लिए जाएंगे, आम जनता उन्हें देख भी सकेगी। सुभाष चंद्र बोस माने जाने वाले गुमनामी बाबा का फैजाबाद में म्यूजियम बनाने की प्रक्रिया संस्कृति विभाग ने हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू की थी।
इसकी जिम्मेदारी राज्य संग्रहालय निदेशालय को दी गई है। संग्रहालय में गुमनामी बाबा से जुड़ी हर चीज रखने की तैयारी है। फैजाबाद के राम भवन में रह रहे गुमनामी बाबा ही सुभाष चंद्र बोस तो नहीं थे।
इसे जानने को कलकत्ता हाईकोर्ट ने मुखर्जी आयोग बनाया था। आयोग के सदस्य फैजाबाद से जांच के लिए गुमनामी बाबा का सामान ले गये थे। हाईकोर्ट ने 31 जनवरी 2013 को निर्देश दिया था कि फैजाबाद के रामभवन में रहने वाले गुमनामी बाबा के सामानों को फैजाबाद में म्यूजियम बनाकर सुरक्षित किया जाये।
मुखर्जी आयोग से जांच के लिए ले जाये गये सामानों को वापस लाया जाये। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शासन ने इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी थी। यह कार्य करने में उसे करीब ढाई साल का समय लग गया।
म्यूजियम में गुमनामी बाबा के कमरे से मिला सामान रखा जायेगा। इसमें उनका खासतौर पर फ्रेम किये गये चश्मे, जर्मन निर्मित गोल्डेन गोल फ्रेम का चश्मा, जापान का टी सेट, जर्मनी, जापान और इंग्लैंड निर्मित लाइटर, कई ब्रांड की सिगरेट, दूरबीन, स्विस निर्मित जेब घड़ी, बक्सा, हस्त लिखित प्रतिलिपियां, दस्तावेज, वर्दी, बक्सा आदि सामान शामिल हैं।
सुभाष चंद्र बोस राष्ट्रीय विचार केंद्र के अध्यक्ष व मुकदमे के वादी शक्ति सिंह का कहना है कि रामभवन में रह रहे गुमनामी बाबा के सामानों को संजोकर रखने के लिए आखिर ढाई साल बाद यह कदम सरकार क्यों उठा रही है।
हाईकोर्ट ने उनके द्वारा दायर मुकदमे में आदेश तो 31 जनवरी 2013 में ही सुनाया था। प्रधानमंत्री ने दिल्ली में ‘नेता जी संग्रहालय’ बनाने की घोषणा कुछ दिन पहले की है।
इसी के बाद प्रदेश सरकार ने यह तेजी दिखाई है। अब अहम सवाल यह है कि गुमनामी बाबा का सामान फैजाबाद संग्रहालय में होगा अथवा दिल्ली में?