पीछे के दो डिब्बे तिरछे और पहियों के कोर पटरियों से टिके तो चालक और शंटर सभी सकते में आ गये। वजह ट्रैकों का गैप बढ़ा समझ में आई।
इसकी सूचना स्टेशन अधीक्षक और इंजीनियरिंग विभाग को दी गई। गैप बढ़ा मिलने पर इंजीनियरिंग महकमा सकते में आ गया। सभी को खुशी इस बात से थी कि कोई कोच नहीं गिरा और रेलवे संपत्ति का बड़ा नुकसान बच गया।
लखनऊ से गुरुवार सुबह आई लखनऊ-फैजाबाद पैसेंजर ट्रेन के कोचों को लखनऊ की पावर सं.11133 से वॉशिंग लाइन में धुलाई मरम्मत को ले जाया जा रहा था।
मोदहा छोर से पूरी गाड़ी लाइन में घुस गई थी। वॉशिंग पिट के दोनों किनारों पर बंधी पटरियों के कई इंसर्ट उखड़े व पेंड्रोल गायब होने से दबाव के चलते पटरियों का गैप बढ़ गया।
ऐसे में उत्तर रेलवे के कोच नंबर 06449 तथा लगेज नंबर 08005 के पहिये पटरी के सहारे लटक गये। गैप थोड़ा भी बढ़ता तो डिब्बे गहरे गड्ढे में गिर जाते।
चालक व शंटर को कोच की बाडी तिरछी तथा एक इधर दूसरी उधर मिली तो चकित रह गया। सूचना एसएम और वहां से इंजीनियरिंग विभाग को दी गई।
चालक से गाड़ी पीछे करने को कहा गया तो उसने इनकार कर दिया। इस पर दोनों कोचों को अलग कर आदमियों के सहारे पीछे ले जाया गया। डिब्बों को रोकने के लिए पटरियों पर ईंट और पत्थर रखे गए।
बाद में इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी व गैंगमैन स्केल लगाकर ट्रैक सही करने उतर पड़े।
मुख्य रेल पथ निरीक्षक, फैजाबाद नंदन सिंह ने बताया, पटरियों को इधर उधर भागने से रोकने के लिए लगाये जाने वाले कई इंसर्ट उखड़ गये थे। इससे इंसर्ट में लगाये जाने वाले पेंड्रोल भी निकल गये। ऐसे में पटरियों का गैप कुछ बढ़ गया। इसे इंजीनियरिंग विभाग ने सही कर दिया है।