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अयोध्या 150 करोड़ की आई थीम पार्क योजना पर डीएम ने लगाई रोक

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अयोध्या। 150 करोड़ की लागत से अयोध्या में बन रहे ‘आई थीम’ पार्क पर ग्रहण लग गया है। डीएम अनुज कुमार झा ने चयनित स्थल के फ्लड जोन में होने से निर्माण को अनियमित ठहराया है। पर्यटन विभाग के साथ मिलकर एक निजी कंपनी की ओर से बनाए जा रहे पार्क की योजना पर गुरुवार को पूरी तरह से रोक लगा दी गई। कृत्रिम झील के निर्माण को भी रोक दिया गया है।
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आई थीम वाटर पार्क बना रही शिवा कंस्ट्रक्शन पर बैनामे से अधिक जमीन कब्जा करने का भी आरोप जांच में सही मिला है। रिपोर्ट में कृत्रिम झील बनाने के लिए अवैध खनन करने की भी बात कही गई है।
अयोध्या में पर्यटन सुविधाओं के लिए 21 फरवरी 2018 को लखनऊ के इनवेस्टर मीट में पर्यटन विभाग और शिवा कंस्ट्रक्शन अयोध्या के बीच एमओयू साइन हुआ था। निवेशक की ओर से 38 करोड़ की लागत से सरयू किनारे माझा इलाके में विश्वस्तरीय थीम पार्क व रिसोर्ट बनाने का प्रस्ताव था। काम शुरू होते ही लागत 150 करोड़ रुपये हो गई।
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परियोजना स्थापना के लिए जमीन से जुड़े कागजात कंपनी की ओर से महानिदेशक, पर्यटन को ई-मेल से भेजे गए। बाद में क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी व एसडीएम सदर ने मौके पर जांच की। पर्यटन विभाग ने परियोजना का पंजीकरण करते हुए महानिदेशक पर्यटन की ओर से 14 जून को पत्र भेजकर सभी सुविधाएं देने का भरोसा दिया।
बाद में झील की खोदाई शुरू हुई तो 12 सितंबर को अभियंता, बाढ़ खंड अयोध्या ने सरयू तटबंध की सुरक्षा को खतरा बताते हुए थीम पार्क के निर्माण व झील की खोदाई रोकने की संस्तुति की। जबकि कंपनी की ओर से 30 हजार घन मीटर बालू निकासी का तीन भागों में रॉयल्टी जमा कराकर माइनिंग प्लान 3 नवंबर 2018 स्वीकृत करा लिया गया। मामले में जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी ने बाढ़ खंड की रिपोर्ट पर 4 अक्तूबर को 2019 को प्रोजेक्ट की एनओसी रद्द कर दी।
शिवा कंस्ट्रक्शन की निदेशक माधुरी सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अपील की, तो 11 नवंबर 2019 को डीएम को प्रत्यावेदन देकर निस्तारण का आदेश हुआ। डीएम ने 8 जनवरी को मामले में फैसला सुनाया। डीएम अनुज कुमार झा की ओर से समूचे प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा गया है कि थीम पार्क में निर्माण मानकों के विपरीत फ्लड जोन में किया जा रहा है।
अवैध खनन के साथ बैनामे से अधिक भूमि का कब्जा भी जांच में सही निकला। अधिशाषी अभियंता बाढ़ कार्य खंड अयोध्या की आख्या के अनुसार उक्त निर्माण अयोध्या बिल्वहरिघाट तटबंध से सटाकर रीवर साइड टू के समीप कराया जा रहा है। बाढ़ कार्य खंड अयोध्या के समक्ष एनओसी की मांग के समय प्रस्तुत मास्टर प्लान के विपरीत है।
23 अक्तूबर 2018 को जारी शासनादेश में यह स्पष्ट किया गया है कि फ्लड जोन में किसी भी प्रकार का निर्माण अनुमन्य नहीं है। अधिशाषी अभियंता बाढ़ कार्य खंड की 12 सितंबर 2019 रिपोर्ट से पता चलता है कि झील के बचाव/ निर्माण स्थल के बचाव हेतु लोकल रीवर सैंड द्वारा निर्माण स्थल के तीनों तरफ बंधा का निर्माण किया गया है जो कि विगत वर्ष एवं बाढ़ अवधि में घाघरा की कटान से प्रभावित भी हुआ है।
यदि नदी की धारा निर्मित कृत्रिम झील के समीप पहुंच जाती है तो तटबंध धंस सकता है, जिससे प्राचीन अयोध्या नगरी सहित कई गांव प्रभावित हो सकते हैं। इस दृष्टि से भी यह निर्माण अनुचित है। डीएम ने क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी अनियमित निर्माण के परिप्रेक्ष्य में पर्यावरण को होने वाली क्षति का आकलन कर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। डीएम ने कंपनी के प्रत्यावेदन को निरस्त कर दिया है।
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