परमहंस आचार्य ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से शालिग्राम पूजन स्थल पर मिलकर उन्हें अपना विरोध पत्र दिया। उन्होंने कहा कि शालिग्राम को जीवाश्म पत्थर के रूप में जाना जाता है और इनका आवाहन और पूजा भगवान के प्रतिनिधि के तौर पर की जाती है।
शिवभक्त पूजा करने के लिए इसे शिवलिंग के रूप में अलग-अलग रूपों में उपयोग करते हैं। कहा जाता है कि शालिग्राम को प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती।