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खुल गई कार्यक्रमों और योजनाओं के संचालन की कलई

Fri, 26 Jun 2015 11:38 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
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सूबे में ब्यूरोक्रेसी के मुखिया के दौरे में सब कुछ भले ही सकुशल निपट जाने की बात कही जाए, लेकिन कई मायनों में यह दौरा कार्यक्रमों और योजनाओं के संचालन की असलियत उजागर कर गया। यदि बड़े अफसरों के दौरे में कुछ गड्ड-मड्ड दिखे तो इसे क्या कहा जाएगा।
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वह भी तब जब दो महीने तक गांवों को लकदक करने के लिए अभियान चलाया गया हो। खासतौर से अंतिम चरण में तो केवल पांच गांवों पर ही फोकस कर दिया गया, लेकिन इन गांवों में भी कार्यक्रमों पर धब्बे लगे। भ्रष्टाचार की शिकायतें की गईं, आवास और शौचालय मानक पर नहीं दिखे।

दूसरी खामियां सतह पर आने के साथ यह बात भी चर्चा में आई। इसके पहले योजनाओं और कार्यक्रमों का संचालन गांवों में अब भी रामभरोसे है। शनिवार को प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन प्रसाद के दसौली के निरीक्षण में उमाशंकर के घर के पास का इंडिया मार्का टू हैंडपंप बंद मिला तो सियाराम के घर के पास लगे हैंडपंप से गंदा पानी आता मिला।
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लखराजी तीन साल से वृद्धावस्था पेंशन, राम प्रसाद पुत्र राम गोपाल को पेंशन, राजकली विधवा पेंशन वंचित मिले। प्रमुख सचिव सुरेश चंद्रा के रामपुर सर्धा गांव के निरीक्षण में फूलमता और उर्मिला के आवास मानक के विपरीत मिले। क्षेत्र पंचायत सदस्य संतोष सिंह और चंद्र मौलि सिंह ने गांव में विद्युतीकरण योजना के तहत ठेकेदार के आदमियों से कनेक्शन के लिए पैसा वसूले जाने की शिकायत की।

हद तो तब हो गई, जब ठेकेदार ने पैसा लेने की बात तक कही डाली। दो महीने की कसरत के बाद भी प्रमुख सचिव अर्चना अग्रवाल के दौलतपुर के निरीक्षण में खामियां मिलीं। इंदिरा आवास का पूरा पैसा न मिलने की जानकारी अफसरों को उस दिन हुई।

मुकेश के अपूर्ण शौचालय के बारे जानकारी नहीं रही। मदरसे को जाने वाले रास्ते पर अवैध कब्जे का पता नहीं चला। सवर्ण को तालाब के पट्टे पर किसी की नजर नहीं गई। ओम प्रकाश, सियाराम, रोशन लाल को कागजों में पट्टा दे दिया गया, उनको पता नहीं चला। ऐसे में चर्चा आम हो गई है कि आम दिनों में कार्यक्रमों और योजनाओं का संचालन रामभरोसे ही रहता है।
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