जीएसटी लागू होने के पहले दिन बाजार फिलहाल पुराने ढर्रे पर दिखा। होटल, रेस्तरां में भोजन और नाश्ता जरूर सस्ता मिला तो अन्य व्यवसायों में स्थिति में अभी बदलाव नहीं दिखा।
वस्तु एवं सेवा कर की नई व्यवस्था को लेकर अब तक न तो व्यापारियों के सिस्टम अपडेट हैं और न ही उपभोक्ताओं को इसके बारे में बहुत जानकारी है। ऐसे में सब-कुछ घालमेल मेें चल रहा है।
एक देश, एक कर की अवधारणा अभी शहर से देहात तक केवल चर्चा में आ पाई है, लेकिन प्रभावी नहीं हो पाई। टैक्स स्लैब से लेकर जीएसटी के तहत व्यापार किए जाने की प्रणाली की गहरी जानकारी बाजार से जुड़े लोगों को अभी नहीं हो पाई है।
सामानों पर टैक्स की सूची अब तक बाजार में नहीं है, न ही खरीद-बिक्री के पर्चे का मजमून मिल पाया है। वाणिज्य कर विभाग के अफसरों का कहना है कि इनवाइस सहित आठ प्रपत्र यहां पहुंच गए हैं।
व्यापारियों के सिस्टम अभी जीएसटी के लिए पूरी तरह अपडेट नहीं हो पाए हैं। इसके कारण भी छोटी दुकानों से प्रतिष्ठानों तक आम आदमी का वास्तविक लाभ-हानि मिलना नहीं शुरू हो पाया है।
शहर के होटल, रेस्टोरेंट में नाश्ता, भोजन पहले से जरूर सस्ता मिला। शनिवार को बिना किसी टैक्स के हाथ से बिल काटकर दे रहे थे। ज्यादातर होटल के मालिकों का कहना था कि उन्हें अभी जानकारी नहीं है इसलिए कोई कर नहीं ले रहे हैं।
देवकाली के पास एक रेस्तरां ने सिस्टम को अपडेट करके जीएसटी के आधार पर पर्चा काटना शुरू कर दिया हैं। बाजार में छूट की व्यवस्था नहीं दिखी। ग्रामीण क्षेत्र में चीनी, चाय, आटा, दाल के साथ ही फुटकर में अन्य सामान के खरीदारों का कहना था कि उन्हें सामान पहले के रेट पर मिला।
विभाग ने व्यापार में दिक्कत न हो इसके लिए व्यापारियों को अभी टिन नंबर पर कारोबार की छूट दी है। इससे सहूलियत है लेकिन आम लोग जीएसटी को लेकर अपडेट नहीं हुए हैं। वस्तुओं पर टैक्स और लाभ हानि की जानकारी उन्हें नहीं है।
इसलिए उपभोक्ताओं को रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम पहले जैसे चुकाने पड़ रहे हैं। जीएसटी से लाभ-हानि का आंकलन उनको नहीं हो पा रहा है। बातचीत में व्यापारी और उपभोक्ता दोनों को आज नहीं तो कल लाभ की उम्मीद जरूर है।