वेतन आयोग की रिपोर्ट के विरोध में प्रदर्शन करते रेलकर्मी।
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सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट को रेल कर्मियों ने खारिज कर दिया है। बुधवार को कैबिनेट की मुहर लगने के बाद प्रकाशित हुई तो गुरुवार को रेलकर्मी विरोध में उतर पड़े। एनआरएमयू कार्यालय पर गेट मीटिंग करने के बाद विरोध करने के लिए स्टेशन जा धमकी।
एक छोर से दूसरे छोर तक नारेबाजी हुई। ‘शौक नहीं मजबूरी है, अब हड़ताल जरूरी है।’ ‘पे कमीशन की रिपोर्ट मंजूर नहीं-मंजूर नहीं’ के साथ सरकार विरोधी नारे लगे। एसएस कार्यालय के पास आधा घंटे तक प्रदर्शन किया। देशव्यापी 11 जुलाई की हड़ताल को अब अडिग बताया। उसके बाद सभी अपने कार्य पर लौट गये।
धरने को संबोधित करते हुए एनआरएमयू के मंडल अध्यक्ष आरजे कनौजिया, शाखाध्यक्ष सुदर्शन सिंह और मंत्री हीरालाल ने कहा कि पेश सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट में उनकी जायज मांगों की अनदेखी की गयी है। रिपोर्ट वह खारिज करते हैं और 11 जुलाई की हड़ताल अब टल नहीं सकती।
वक्ताओं का कहना था कि केंद्रीय कर्मियों के लिए हुई संस्तुतियां, न्यू पेंशन स्कीम उन्हें मंजूर नहीं है। न्यूनतम वेतनमान 26 हजार से कम उन्हें स्वीकार नहीं है। रेलवे में आउट सोर्सिंग बंद हो। रेलवे में खाली पड़े हजारों हजार पदों को शीघ्र भरा जाये। कार्य के घंटों को नियमानुसार लागू किया जाये।
कारखाना नियमों में परिवर्तन कर रोक लगायी जाये। बोनस भुगतान के लिए न्यूनतम वेतन सात हजार की दर से गणना कर 2014-15 से लागू किया जाये। धरना-प्रदर्शन में स्टेशन अधीक्षक जीपी सिंह, बीपी मिश्र, अश्विनी तिवारी, डीके त्रिपाठी, संजीव कनौजिया, बीबी सिंह, अंबिका मौर्य आदि शामिल थे।