अयोध्या। जनवादी लेखक संघ की ओर से ‘छंद की कविता और कविता का छंद’ शीर्षक से रविवार को शहर में एक व्याख्यान एवं काव्य पाठ का आयोजन किया गया। व्याख्यान में लखनऊ से आए वरिष्ठ कवि एवं आलोचक राजेंद्र वर्मा ने कहा कि दुनिया की कोई कविता ऐसी नहीं है जो लय या छंद से विहीन हो।
हिंदी और उर्दू कविता के छंदशास्त्र की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि इन दोनों भाषाओं में मूलत: कोई अंतर नहीं है। उन्होंने गजल की विभिन्न बहरों की उदाहरण सहित विवेचना प्रस्तुत की। आरडी आनंद ने कहा कि वेदना और करुणा की एक आंतरिक लय होती है जो हर कविता में लक्षित होती है।
दूसरे सत्र में युवा शायर मुजम्मिल फिदा ने ‘बागबान खुद है नशेमन को जलाने वाला’, इल्तिफात माहिर ने ‘जिसे खुलूस ने मारा हो वो कहां जाए’, जयप्रकाश श्रीवास्तव ने ‘बिछ गई है बिसातें चले आइए’ अ्रौर अखिलेश सिंह ने ‘जब जीवन सौंपा पीड़ा को, पीड़ा में ही पाया जीवन को आदि गीत व शेर सुनाए। मोतीलाल तिवारी, जसवंत अरोड़ा,आशाराम जागरथ, अनिल श्रीवास्तव और कवयित्री रीता शर्मा ने भी काव्य पाठ किया।
व्याख्यान के दौरान विनीता कुशवाहा, आरएन कबीर, मो याकूब, शेर बहादुर शेर, राम दुलारे यादव, तारिक, शिवधर द्विवेदी के साथ कई लोग मौजूद रहे। इससे पहले डॉ. विशाल श्रीवास्तव एवं कार्यक्रम संयोजक सत्यभान सिंह जनवादी, युवा कवि कबीर और धीरज द्विवेदी ने अतिथियों का सम्मान किया।