अयोध्या। कोरोना संक्रमण काल में जिला महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञों का अकाल हो गया है। स्वीकृत आठ पदों के सापेक्ष महज दो स्त्री रोग विशेषज्ञ ही अस्पताल में रह गई हैं, वह भी अवकाश पर हैं।
इन दिनों यहां पहुंचने वाली प्रसूताओं का जीवन दो संविदा चिकित्सकों के सहारे ही है, जिनकी संविदा भी समाप्ति की ओर है। साथ ही मेडिकोलीगल व अन्य कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। सीएमएस ने शीघ्र ही चिकित्सकों की व्यवस्था करने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है।
जिले की आधी आबादी के प्रसव संबंधी इलाज के लिए करीब दो सौ बेड का जिला महिला चिकित्सालय संचालित है। यहां कमोवेश संसाधन तो पर्याप्त उपलब्ध हैं, लेकिन चिकित्सकों की भारी कमी से मौजूद संसाधनों का भी यथोचित इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
कोरोना का कहर बढने पर हुए लॉकडाउन में जब निजी अस्पतालों में सेवाएं बाधित हुईं, तभी से महिला अस्पताल में कार्य का बोझ और बढ़ गया है। प्रतिमाह होने वाले सीजेरियन आपरेशन व सामान्य प्रसवों के आंकड़ों से इसकी पुष्टि भी हो रही है।
इन दिनों यहां प्रतिदिन अमूमन 5-6 सीजेरियन आपरेशन किए जाते हैं। साथ ही जिले व मंडल के अन्य जिलों से महिलाओं के साथ अपराध होने पर तमाम मेडिकोलीगल भी यहीं के लिए भेजे जाते हैं। अन्य विशेषज्ञों की कमी से तो कार्य किसी तरह चल रहे थे, इन दिनों स्त्री रोग विशेषज्ञों का भारी टोटा होने से हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञों के आठ पद पूर्व से स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष यहां पर तीन चिकित्सकों की तैनाती थी। जबकि बाल रोग विशेषज्ञ के पद पर तैनात हुई एक महिला चिकित्सक से भी इमरजेंसी ओपीडी सेवाएं ली जाती रही हैं। इनमें वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रंजना खरे का तबादला लखनऊ के लिए हो गया तो सिर्फ दो चिकित्सक डॉ. प्रियंका जैन व डॉ. जोया वर्मा ही बचीं। डॉ. प्रियंका जैन लंबे अवकाश पर हैं, जबकि डॉ. जोया वर्मा कोरोना संक्रमित होने की दशा में आइसोलेट चल रही हैं, जिनकी भी वापसी अभी संभव नहीं लग रही है।
इस तरह सारा दारो-मदार बची दो संविदा चिकित्सक क्रमश: डॉ प्रभा सिंह व डॉ अस्मिता मिश्रा के कंधों पर टिका है। जिनकी संविदाएं भी समाप्ति की ओर हैं। इसके अलावा संविदा के अन्य एमबीबीएस चिकित्सकों से नार्मल प्रसव व ओपीडी सेवाएं तो ली जा सकती हैं, लेकिन सीजेरियन प्रसव के लिए विशेषज्ञों की ही जरूरत है। माना जा रहा है कि यदि शीघ्र ही चिकित्सकों की व्यवस्था नहीं हुई तो महिला अस्पताल में कार्य बाधित हो सकते हैं। सीएमएस ने मामले से सीएमओ व जिलाधिकारी को अवगत कराते हुए भेजकर चिकित्सकों की मांग किया है।
अन्य चिकित्सकों का भी है टोटा
महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञों के अलावा अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी भारी कमी है। मैटरनिटी विंग को मिलाकर बेहोशी के चिकित्सकों के पांच पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष दो की तैनाती है, इनमें भी एक चिकित्सक की संविदा 16 अक्तूबर को समाप्त हो रही है। मैटरनिटी विंग में बाल रोग विशेषज्ञ के सभी तीन पद रिक्त चल रहे हैं।