अखिल भारतीय श्रीपंच रामानंदीय निर्वाणी अनी अखाड़ा हनुमानगढ़ी के द्वादश वर्षीय नागापना महोत्सव में बुधवार को बासंतिया व हरद्वारीे पट्टी का दीक्षांत समारोह वैदिक पूजन-अर्चन के साथ संपन्न हो गया। प्रसिद्ध चरण पादुका स्थल व हनुमत संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोहों में दोनों पट्टियों में लगभग सौ नागा साधुओं ने धर्म रक्षा व संप्रदाय के प्रति निष्ठा की शपथ ली।
अखाड़े का रस्मी भंडारा हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में संतों ने भाग लिया। हनुमानगढ़ी के प्रसिद्ध चरण पादुका स्थल पर दीक्षांत समारोह की शुरूआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अर्चन से हुआ। बासंतिया पट्टी के महंत रामचरन दास ने पवित्र चरण पादुका पर नए नागा साधुओं को सामूहिक रूप से धर्म की रक्षा व संप्रदाय के प्रति निष्ठा की शपथ दिलाई।
बासंतिया पट्टी में शामिल होने वाले नए साधुओं को दीक्षित करते हुए उन्हें नागा उपाधि से अलंकृत किया। नागा साधुओं को आशीर्वचन देते हुए उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों से भारतीय धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिए गठित अखाड़ों का महत्व उनके सदस्यों की निष्ठा व समर्पण से ही जीवंत है।
दीक्षांत समारोह के बाद रस्मी भंडारा हुआ। इसमें श्रीहनुमान जी का विशेष प्रसाद बंटा। इसी क्रम में संस्कृत महाविद्यालय में हरद्वारी पट्टी के महंत मुरलीदास ने नए नागा साधुओं को सामूहिक रूप से धर्म की रक्षा व संप्रदाय के प्रति निष्ठा की शपथ दिलाई और हरद्वारी पट्टी में शामिल होने वाले नए नागाओं को दीक्षित करते हुए उन्हें नागा उपाधि से अलंकृत किया।
समारोह में बासंतिया के महंत रामचरन दास, महंत भवनाथ दास, महंत हरिदास, गौरीदास, महंत रामभद्र दास, महंत रामकृष्ण दास, रामशंकर दास, सुरेश दास, मधुबन दास, सियाराम दास, दयानंद दास, रविशंकर दास, रतन दास, श्रवण दास, राम सुंदर दास, केदार दास, केशव पहलवान आदि नागातीत संत शामिल रहे।