अयोध्या। सिविल लाइंस स्थित अयोध्या डिपो में बसों को खड़ा करने के लिए करीब 49 लाख की लागत से 18 प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं। इसके लिए मुख्य कार्यालय के पीछे की जर्जर बिल्डिंग को गिराया जा रहा है। इसके बन जाने के बाद स्टेशन परिसर के बाहर बसों के खड़े होने से लगने वाले जाम की समस्या से निजात मिल जाएगी।
इसके साथ ही परिसर में चल रहे वर्कशॉप का रंगरोगन भी किया जाएगा। इन प्लेटफॉर्म के निर्माण के बाद दूसरे चरण में यहां शौचालय, मुख्य गेट, पेयजल आदि के लिए कार्य होगा। वहीं, स्टेशन की मुख्य बिल्डिंग व कार्यालय का कायाकल्प होना अभी बाकी है।
प्रथम चरण में मुख्य कार्यालय के द्वितीय तल की जर्जर बिल्डिंग को गिराया जा चुका है। इसके बाद इसके पीछे बने स्टोर, यूनियन कार्यालय, पुरानी कैंटीन व इसके बगल बने शौचालय आदि को गिराने का कार्य अंतिम चरण में है। प्रथम चरण कार्य पूरा होने के बाद द्वितीय चरण में शौचालय, दोनों ओर नए गेट का निर्माण व पेयजल उचित इंतजाम किए जाएंगे।
अभी बाहर सड़क पर ही खड़ी होती हैं बसें
एक दशक से अयोध्या बस स्टेशन की बिल्डिंग पूर्णतया जर्जर हो चुकी है। साथ ही परिसर में बसों के खड़े होने वाला स्थान भी गड्ढों में तब्दील हो गया है। बरसात के दिनों में परिसर तालाब में तब्दील हो जाता है। इसके चलते अयोध्या डिपो समेत बाहर से आने वाली बसें अंदर परिसर में खड़ी न होकर बाहर सड़क के दोनों पटरियों पर खड़ी होती हैं।
इसके चलते यहां अकसर जाम की स्थिति बनीं रहती है। इसको लेकर प्रशासन ने कई बार परिवहन निगम को कड़ा पत्र भी लिखा था। फिलहाल बस स्टेशन के अंदर बसों के खड़े होने से जाम नहीं लगेगा।
प्रथम चरण में 49 लाख की लागत से 18 नए प्लेटफार्म, यात्री शेल्टर का निर्माण व वर्कशॉप का रंगरोगन कराया जा रहा है। इससे बस स्टेशन के बाहर लगने वाले जाम से भी निजात मिलेगी। बाकी काम दूसरे चरण में कराए जाएंगे।
-विमल रंजन, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम अयोध्या