अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर को अब शीघ्र ही एमआरआई मशीन की सौगात मिलने की उम्मीद है। शासन की ओर से इसके लिए कवायद तेज की गई है। पीपीपी मॉडल पर स्थापित होने वाली इस मशीन के लिए नामित की गई एक संस्था ने दो दिन पूर्व मेडिकल कॉलेज पहुंचकर सर्वे किया है और सितंबर तक मशीन स्थापित होने का संकेत दिया है।
यदि सब कुछ सही रहा तो लोगों को एमआरआई स्कैन के लिए अब लखनऊ तक का चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी। जिले की करीब 29 लाख आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए चार जिला स्तरीय अस्पतालों के अलावा 100 बेड का कुमारगंज अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) संचालित हैं।
यहां चिकित्सक और कर्मचारियों की कमी के साथ-साथ संसाधनों का भी अकाल है। इधर, दर्शननगर में बने 300 बेड के अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने के बाद से जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में एक-एक करके इजाफा किया जा रहा है। वर्ष भर पूर्व यहां सीटी स्कैन मशीन स्थापित की गई है, जो मौजूदा समय में पीपीपी मॉडल पर संचालित है।
अब एक और कदम आगे बढ़ते हुए मेडिकल कॉलेज को एमआरआई मशीन लगाने की तैयारी है। मालूम हो कि सीटी स्कैन के जरिए शरीर के अंगों में अंदरूनी चोटों आदि की जांच की जा सकती है, लेकिन मस्तिष्क, हड्डियों व मांसपेशियों, सॉफ्ट टिश्यू, चेस्ट, ट्यूमर कैंसर, स्ट्रोक, डिमेंशिया, माइग्रेन, धमनियों के ब्लॉकेज, जेनेटिक डिस्ऑर्डर आदि से संबंधित जानकारी के लिए एमआरआई मशीन की आवश्यकता होती है।
मशीन बॉडी को स्कैन कर अंग के किस हिस्से में दिक्कत है, यह जानकारी देती है। इसमें मैग्नेटिक फील्ड व रेडियो तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर के अंदर के अंगों की विस्तार से इमेज तैयार करती है। जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा न होने से मरीजों को इसके लिए निजी डाइग्नोस्टिक सेंटरों में करीब पांच से छह हजार रुपये देकर जांच करानी पड़ती है या फिर लखनऊ तक का चक्कर लगाना पड़ता है।
लोगों को इसी तकलीफों से निजात देने के लिए अब मेडिकल कॉलेज में एमआरआई स्कैन मशीन लगाने की कवायद शुरू की गई है। दो दिन पूर्व शासन की ओर से नामित की गई एक संस्था ने मेडिकल कॉलेज पहुंचकर सर्वे किया है। ओपीडी क्षेत्र में स्थापित सीटी स्कैन मशीन के बगल के कक्ष में इसे स्थापित कराया जाना है। कार्यदायी संस्था ने सितंबर माह तक मशीन स्थापित होने के संकेत दिए हैं।
एमआरआई स्कैन मशीन भी सीटी स्कैन मशीन की तरह ही पीपीपी मॉडल पर संचालित की जाएगी। मरीजों को निर्धारित प्रारूप पर संबंधित सरकारी चिकित्सक से लिखवाकर जाना होगा, जहां उनकी निशुल्क जांच होगी। कार्यदायी संस्था उसी आधार पर शासन से जांच के एवज में धनराशि प्राप्त करेगी।
मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) मशीन अब मेडिकल कॉलेज में लगनी है। यह मशीन पीपीपी मॉडल पर संचालित की जाएगी। संस्था शासन की ओर से आवंटित की गई है, जिसने सर्वे कर लिया है। सितंबर तक मशीन स्थापित करने का आश्वासन संस्था की ओर से दिया गया है। -डॉ. विजय कुमार, प्रिंसिपल, राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज, दर्शननगर