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शोध संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह के निधन से शोक

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अयोध्या। राम व रामायण पर वृहद स्तर पर काम करने वाले अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह का नोएडा के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे कोरोना संक्रमित थे, पहले लखनऊ में फिर नोएडा में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से साहित्यकारों, विद्वानों में शोक की लहर दौड़ गई है। वे वर्तमान में राम व रामायण पर आधारित अब तक के सबसे बड़े प्रोजेक्ट ग्लोबल इंसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण पर काम कर रहे थे।
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अयोध्या शोध संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी रामतीरथ ने बताया कि 26 अप्रैल 2002 से वे अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक पद पर रहे। योगी सरकार में उनको प्रोन्नति मिली थी और उन्हें संस्कृति विभाग के संयुक्त निदेशक की भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लगभग 19 साल के अपने कार्यकाल में उन्होंने अयोध्या शोध संस्थान को नया मुकाम दिया।
अयोध्या शोध संस्थान राम व रामायण पर शोध करने वाला सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा। राम की वैश्विक यात्रा पर उनके द्वारा की गई शोध मील का पत्थर साबित हुई। विभिन्न देेशों, भारत के कोने-कोने में व्याप्त राम संस्कृति को लेकर उन्होंने न सिर्फ गहन अध्ययन किया बल्कि उसका दस्तावेज भी तैयार करा रहे थे।
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रामतीरथ बताते हैं कि उनके द्वारा ही 19 मई 2004 को अयोध्या शोध संस्थान में अनवरत रामलीला प्रारंभ की गई जो कि कोरोना काल से पहले तक संचालित रही। इस दौरान देश-विदेश की रामलीला का मंचन अयोध्या में हुआ तो भारतीय कलाकारों ने भी विश्व के कई देशों में रामलीला का मंचन किया।
दो वर्षों से विदेशी कलाकारों को हिंदी में रामलीला का प्रशिक्षण देने का काम भी चल रहा था। अयोध्या शोध संस्थान के बैनर तले अयोध्या में सांस्कृतिक गतिविधियों को खूब बढ़ावा मिला तो इसका श्रेय भी वाईपी सिंह को ही जाता है। दीपोत्सव में कई देशों की रामलीला सहित भारत की लोककला का प्रस्तुतीकरण उन्हीं के प्रयास का परिणाम रहा।
हाल ही में 120 देेशों का रामायण समूह बनाने की तैयारी चल रही थी। इसके लिए ग्लोबल इंसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण का प्रकाशन होना था। दो सौ खंडों में इसका प्रकाशन होना है। पहले अंक का विमोचन कुछ ही महीनों पूर्व लखनऊ में मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर है।
उनके साथ अयोध्या पर शोध कर चुके वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरिप्रसाद दुबे ने कहा कि वाईपी सिंह ने रामायण संस्कृति को रामलीला व सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए न सिर्फ देश के कोने-कोने व विदेशों में भी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। वे राम व रामायण को लेकर कई बड़ेे प्रोजेक्ट पर काम करने की तैयारी में थी, उनका निधन अपूर्णनीय क्षति है।
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