सरकारी विद्यालयों में बच्चों को दूध पिलाने की योजना बुधवार को शुरू तो हुई लेकिन ज्यादातर स्कूलों में दूध के लिए बच्चे टुकुर-टुकुर ताकते रह गए। अधिकतर विद्यालयों में दूध का प्रबंध नहीं हो सका। ग्रामीण क्षेत्रों में तो जिन गांवों में दूध पर्याप्त मात्रा में होता है, वहां विद्यालयों में बच्चों को दूध पिलाने में आसानी हुई। दूध पिलाने की महत्वाकांक्षी योजना पहले ही दिन जगह-जगह धराशायी हो गई। पूरा बाजार ब्लॉक के पांच विद्यालयों में दूध पिलाने की योजना की जमीनी हकीकत परखी गई तो उसमें से सिर्फ एक विद्यालय में ही बच्चों को दूध देते देखा गया।
प्रा.वि. कछौली में 52 में से सिर्फ 15 बच्चे और पू.मा.वि. कछौली में 56 में से 34 बच्चे आए थे लेकिन इसमें से किसी को भी दूध नहीं मिला। प्रधानाध्यापक कासिम मेंहदी व धर्मेंद्र वर्मा ने कहा कि प्रधान ने दूध उपलब्ध नहीं कराया। प्रा.वि. नरायनपुर में 72 में से 28 व प्रा.वि. शांतीपुर में 72 में से 27 बच्चे आए थे लेकिन यहां पर दूध की व्यवस्था नहीं थी। सिर्फ प्रा.वि. सरायचेमल में ही बच्चों को दूध दिया गया। तारुन में मुख्य मार्ग से सटे कुछ विद्यालयों में तो शिक्षकों ने चार-छह लीटर दूध खरीदकर बच्चों को पिलाया। तारुन, केवलापुर, पारागरीबशाह में अध्यापकों ने चार छह लीटर दूध की व्यवस्था की थी जबकि पिछौरा, बेलगरा, पखरपुर, बारा, सनौरा सहित कई स्कूलों में दूध नहीं दिया जा सका। तारुन के प्रधानाध्यापक सुनील प्रताप ने बताया कि दूध के लिए कोई बजट नहीं दिया गया हैं। रुदौली प्रतिनिधि के अनुसार भेलसर न्याय पंचायत के समन्वयक लाल बहादुर ने भेलसर, सोफियाना, पूरे खान व रुदौली सहित नौ स्कूलों का जायजा लिया पर जिस पूर्व माध्यमिक विद्यालय अल्हवाना में वह प्रधानाध्यापक हैं, वहां पर कढ़ी-चावल परोसा गया। यहां के शिक्षक एक कमरे में चाय पीती नजर आईं। लाल बहादुर ने बताया कि उनके यहां भी दूध व कोफ्ता का इंतजाम नहीं हो सका। पू.मा.वि गनौली के प्रधानाध्यापक एम. रहमान ने बताया कि वह अगले बुधवार से दूध का इंतजाम करेंगे। प्रा.वि. अख्तियारपुर की प्रधानाध्यापिका अफ्शां निकहत व उच्च प्राथमिक विद्यालय अख्तियारपुर के प्रधानाध्यापक प्रदीप कुमार ने बताया कि उन्हें दूध पिलाने से बारे में कोई निर्देश नहीं मिले हैं। मवई के प्राथमिक विद्यालय कुंडिरा में बच्चे सुबह साढ़े आठ बजे स्कूल का ताला खुलने का इंतजार करते दिखे। प्रधानाध्यापक विनय कुमार व अन्य नदारद रहे। नेवरा, कोटवा, मवई, उमापुर व सैमसी सहित कई विद्यालयों में भी दूध का इंतजाम नहीं हो सका।