रामनगरी में सावन मेला शुरू होने के साथ ही मठ-मंदिरों में झूलनोत्सव परवान चढ़ने लगा है। शुक्रवार रात से ही मंदिरों में झूले पर चल विग्रहों की वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्थापना के बाद गीत-संगीत व नृत्य की स्वर लहरियां बिखरने लगी हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ आराध्य के दर्शन-पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उमड़ने लगी है।
मठ-मंदिरों में शुरू हुए झूलनोत्सव में पारंपरिक, शास्त्रीय गीत-संगीत व नृत्य के कार्यक्रम भी परवान चढ़ने लगे हैं। शाम होते ही मंदिरों के जगमोहन से तबले की थाप व हारमोनियम की धुनें श्रद्धालुओं को बरबस अपनी ओर खींचने लगीं है। देर रात तक चलने वाले कार्यक्रमों व आराध्य के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है।
रसिक संप्रदाय के झुनकी घाट स्थित सियाराम किला, सद्गुरु सदन गोलाघाट, श्रीरामबल्लभाकुंज, जानकी घाट बड़ा स्थान, कनक भवन में संत-धर्माचार्य व श्रद्धालु ‘झूलन में आज सज-धज के युगल सरकार बैठे है।
‘राम रसिया सरयू किनारे कदम जूरि, भइया राम रसिया हिंडोरा लागे ला बा’, ‘हरे रामा रिमझिम बरसे पनियां झूले राजा रनिया रे हारी’, अरे रामा चमकि रही दमिनियां झूले राजा रनिया ऐ हारी’, आलिन मन मोहने मानौ सुछवि श्रंगार बैठे हैं’, ‘घिरि-घिरि आए घुमड़ घनघोर परे रिमझिम बूंद फुहारें गीतों से सरयू तट गुंजायमान होने लगा है।
इसी तरह रंग महल, सद्गुरु सदन गोलाघाट, कनक भवन, विअहुति भवन, श्रीराम बल्लभाकुंज, हनुमानगढ़ी, जानकी महल ट्रस्ट, श्रीमणिराम दास की छावनी, तुलसीदास की छावनी, अशर्फी भवन, श्रीकालेराम मंदिर, हनुमत निवास, बावन मंदिर, बड़ा स्थान, बड़ा भक्तमाल, हनुमत सदन आदि मंदिरों के जगमोहन में सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गए हैं।