चौक के पास कर्बला की ओर तिरंगे के साथ जाता ताजिये का जुलूस।
- फोटो : अमर उजाला
इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों की कुर्बानी को लेकर बुधवार को दसवीं मोहर्रम पर शहर से जुलूस की शक्ल में करीब एक हजार ताजिए विभिन्न कर्बलाओं में दफन किए गए। मातम के इस जुलूस में देशभक्ति का रंग चटख दिखा। इसमें तिरंगा झंडा लहराया गया, जिसने देशभक्ति के भाव को लोगों में बेहद संजीदगी से जगाया। सर्जिकल स्ट्राइक का असर इतना रहा कि ताजिएदारों ने आतंकवाद के खिलाफ खूब नारेबाजी की।
नवाज शरीफ व पाकिस्तान के विरुद्ध मुर्दाबाद के नारे लगे। अलम व दुलदुला के साथ जुलूस में मातम और करतब में लहूलुहान हो रहे अंजुमनों के सदस्यों को देख दर्शकों के आंसू छलक पड़े। रात नौ बजे तक विभिन्न घरों से निकले ताजिए कर्बलाओं बड़ी बुआ, खुर्द महल, दिल्ली दरवाजा, सिविल लाइंस, मकबरा के पीछे, वजीरगंज जप्ती, फार्ब्स इंटर कॉलेज के पीछे, रेतिया, सआदतगंज अब्बूसराय समेत नगर की विभिन्न कर्बलाओं में दफन किये गये।
सुन्नी समाज की ओर से भी दसवीं मोहर्रम पर 50 से अधिक ताजिए बढ़ी बुआ कर्बला में दफन किये गये। मोहर्रम संचालन कमेटी के अध्यक्ष मुनीर आब्दी व सचिव वसी हैदर गुड्डू ने बताया कि शिया समुदाय ने सबसे अधिक करीब पांच सौ ताजिए बड़ी बुआ और उसके बाद करीब तीन सौ ताजिए खुर्द महल की करबला में दफन किये।