अयोध्या। मनरेगा में ग्राम सचिवों ने बड़ा कारनामा अंजाम दे दिया। किसी जॉब कार्डधारक को सौ दिन का रोजगार नहीं मिल पाया तो दूसरों को नियमों को ताक पर रखकर सौ दिन से ज्यादा का रोजगार दे दिया।
मजदूरी के रूप में हजारों रुपये भुगतान भी कर दिया। ऑनलाइन डाटा खंगालने पर जिले की 125 ग्राम पंचायतों में इस अनियमितता का खुलासा हुआ है। इसे लेकर विभाग में हलचल मच गई। अब आरोपी करीब 60 ग्राम सचिवों से वसूली के फरमान के साथ स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
मनरेगा में जॉबकार्डधारकों को अधिकतम सौ दिन का रोजगार दिए जाने की व्यवस्था है। एक परिवार को इससे ज्यादा का रोजगार नहीं दिया जा सकता है।
व्यवस्था यह भी है कि सौ दिन से ज्यादा के रोजगार दिए जाने के भुगतान के समय साफ्टवेयर स्वयं बता देता है कि सौ दिन के रोजगार की सीमा पार हो रही है लेकिन, मनमानी का आलम कुछ ऐसा रहा कि इस रेडलाइन को धत्ता बताकर ग्राम पंचायतों के सचिवों ने मनमानी रोजगार देकर भुगतान भी कर दिया। जबकि जिले में ऐसे भी सैकड़ों परिवार हैं जिन्हें इसी वित्तीय साल में सौ दिन का रोजगार नहीं मिल पाया।
ऑनलाइन जांच में वित्तीय साल 2018-19 में लगभग 125 ग्राम पंचायतें ऐसी चिह्नित की गई जहां एक परिवार को सौ दिन से ज्यादा का रोजगार देकर मजदूरी का भुगतान किया गया।
इन ग्राम पंचायतों में हजारों रुपये का भुगतान किया गया। इस खेल में सभी 11 ब्लॉकों के पांच दर्जन से ज्यादा ग्राम सचिव आ गए।
खुलासे के बाद हलचल मची तो आरोपी ग्राम सचिवों से स्पष्टीकरण के साथ डीडीओ व डीपीआरओं को इनसे वसूली का निर्देश जारी किया गया। यह तो महज एक साल की जांच में सामने आया, इसके पहले के वर्षों में ऐसे खेल से इनकार नहीं किया जा सकता।