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गुड़ का कारोबार फैला रहा मिठास, व्यापारी भी हुए गदगद

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भेलसर। वर्षों पूर्व रुदौली ब्लॉक के दशरथ मऊ गांव में बड़े पैमाने पर गुड़ बनाने का कारोबार किया जाता था। रौजागांव में चीनी मिल स्थापित होने के बाद किसान अपना गन्ना बेचने लगे। गन्ना की आवक कम होने से क्रेशर धीरे-धीरे बंद हो गई, लेकिन इधर कुछ समय से गुड़ की अधिक मांग को देख क्रेशर संचालकों ने दोबारा गुड़ बनाने का कार्य शुरु कर दिया है। यह छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है।
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रुदौली ब्लॉक के मुस्काबाद गांव के पास बंद पड़े क्रेशर को जिला बिजनौर के दिनेश सिंह ने किराए पर अपने जिले से गुड़ बनाने में माहिर लोगों की टीम लाकर श्रीराम गुड़ उद्योग के नाम से गुड़ बनाने का कार्य शुरू किया। शुद्धता से बने गुड़ को खरीदने को व्यापारी मौके पर आकर ही उठा ले जाते हैं। क्रेशर संचालक को गुड़ उत्पादन से दोहरा लाभ मिल रहा है।
क्रेशर संचालक बताते कि गुड़ तैयार होने पर 30 से 35 रुपये प्रति किलो थोक में दिया जाता है। जिसे बाजारों में 40 से 45 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है। जबकि बाजार में चीनी 38 से 40 रुपये प्रति किलो की दर से मिलती है। पिछले वर्ष गन्ना 325 रुपये प्रति क्विंटल की दर से चीनी मिल खरीद रही थी। इस बार 10 रुपये प्रति क्विंटल रेट में वृद्धि हुई है।
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किसान राम मनोहर, रामनरेश, विकास कुमार, परवेज अहमद, रामगोपाल आदि का कहना है कि अपना गन्ना क्रेशर पर 250 से 260 रुपये प्रति क्विंटल में ही बेचते हैं। चीनी मिल द्वारा गन्ना की तौल के बाद समय से पैसा न मिलने के कारण छोटे किसानों के लिए क्रेशर वरदान साबित हो रहा है, जो अपना गन्ना चीनी मिल न ले जाकर क्रेशर पर ही बेच दे रहे हैं।
क्रेशर संचालक गन्ना की आवक व गुड़ की मांग अधिक होने से बिक्री कर नकद पाकर खुश हैं तो वहीं गन्ना किसान को भी तत्काल दाम मिल जाने से उत्साहित हैं। एक तो वे पैसा समय से पा जा रहे हैं। उन्हें उचित दाम मिलने से नकदी फसल उगाने में फायदा होने लगा है। अब मिल और क्रेशर दो विकल्प होने से कार्य आसान हो गया है।
कोरोना दौर में क्रेशर संचालकों पर पड़ा असर
कोरोना संकट के चलते क्रेशर संचालकों पर भी असर पड़ा है और अब ज्यादातर क्रेशर बंद पड़े हैं। रुदौली ब्लॉक क्षेत्र में अब मात्र दो या तीन ही क्रेशर चल रहे हैं। क्रेशर पर बनने वाले गुड़ को स्थानीय मंडियों के जरिए अन्य प्रदेशों तक भेजा जाता था, लेकिन वाहनों की आवाजाही बंद होने और मंडी में कारोबार न होने से गुड़ की बिक्री बंद हो गई थी। लॉकडाउन के चलते गुड़ बिक्री करने वाले स्थानीय साप्ताहिक बाजार भी बंद हो गए थे, जिसका असर गुड़ की कीमतों पर भी पड़ा था। जिससे क्रेशर बंद होते गए। वर्तमान समय में चीनी से गुड़ मंहगा होने के कारण एक बार फिर क्रेशर संचालक सक्रिय हो गए हैं।
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