अयोध्या। दीपोत्सव के बाद अब कार्तिक मेले में भी बाहरी श्रद्घालु अयोध्या नहीं आ सकेंगे। कोरोना ने सदियों की परिक्रमा की परंपरा पर भी ग्रहण लगाया है। इस बार कार्तिक परिक्रमा मेला कोरोना की गाइडलाइन के तहत होगा।
परिक्रमा मेले में बाहरी श्रद्घालुओं के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है, केवल स्थानीय श्रद्घालु ही परिक्रमा कर सकेंगे। स्थानीय श्रद्घालुओं के लिए मास्क अनिवार्य होगा। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही उन्हें परिक्रमा का अवसर प्राप्त हो सकेगा।
अयोध्या में प्रतिवर्ष करीब 15 से 20 लाख श्रद्घालु रामनगरी की चौदहकोसी व पंचकोसी परिक्रमा करते हैं, लेकिन इस बार परिक्रमा कोरोना के चलते सीमित दायरे में होगी। एक सप्ताह तक चलने वाला रामनगरी का प्रांतीयकृत कार्तिक परिक्रमा-पूर्णिमा मेला 23 नवंबर को चौदहकोसी परिक्रमा के साथ शुरू हो रहा है। 25 नवंबर को जहां पंचकोसी की परिक्रमा होगी।
वहीं 29 व 30 को पूर्णिमा स्नान के साथ ही पर्व का समापन होगा। इस बार कोरोना के चलते परिक्रमा मेले में बाहरी श्रद्घालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन व साधु-संतों द्वारा श्रद्घालुओं ने परिक्रमा मेले में न आने की अपील की जा रही है। हालांकि प्रशासन ने परिक्रमा मेले की तैयारी शुरू कर दी है। स्थानीय श्रद्घालु अयोध्या की परंपरा का निर्वहन कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते हुए कर सकेंगे।
परिक्रमा के लिए मॉस्क अनिवार्य होगा, निश्चित दूरी बनाकर ही परिक्रमा की जा सकेगी। परिक्रमा से पूर्व श्रद्घालुओं की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके लिए प्रशासन परिक्रमा मार्ग पर चेकिंग प्वाइंट बना रहा है। 20 नवंबर से जिले में रूट डायवर्जन की व्यवस्था भी लागू कर दी जाएगी ताकि बाहरी श्रद्घालुओं को अयोध्या में प्रवेश करने से रोका जा सके।
बाहरी श्रद्घालुओं से अयोध्या न आने की अपील की जा रही है। स्थानीय लोग कोविड-19 का पालन करते हुए बिना भीड़ के पारंपरिक कार्यक्रमों का अनुपालन कर सकते हैं। लोग भीड़ वाले कार्यक्रमों से बचे, घरों में पूजा-अर्चना करें। परिक्रमा पथ पर मॉस्क अनिवार्य होगा। स्थानीय श्रद्घालुओं की थर्मल स्क्रीनिंग होगी। परिक्रमा से पूर्व ही अयोध्या की सीमाओं पर रूट डायवर्जन लागू कर दिया जाएगा।