अयोध्या। डाटा फीडिंग में लापरवाही के चलते जिले के हजारों मनरेगा मजदूरों का लगभग 83 लाख रुपये भुगतान फंस गया है। भुगतान के लिए गांव के गरीब मजदूर ब्लॉकों का चक्कर लगा रहे हैं। कई तो थक-हारकर इस राशि को भूल गए हैं। मजदूरों के भुगतान के लिए की जाने वाली फीडिंग में लापरवाही से ये स्थिति पैदा हुई है। अब तो स्थिति ये है कि सुधार के बाद भी पैसा बैंकों से भुगतान नहीं हो पा रहा है।
बेहतर कार्य के लिए बनाई गई तकनीक ने हजारों मनरेगा मजदूरों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। वह मजदूरी के भुुगतान के लिए बार-बार ब्लॉक और मुख्यालय का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन पैसे उनके खाते में नहीं पहुंच पा रहे हैं। मनरेगा में स्थानीय स्तर पर दबाव के बाद अभिलेखों में सुधार के बाद बाधा लखनऊ से पैसा भेजने वाले बैंक बन रहे हैं। बताया जाता है कि ऐसा केवल एक जिले में नहीं है ज्यादातर जिलों में मनरेगा मजदूरों के करोड़ों रुपये फंस गए हैं।
मनरेगा मजदूरों के भुगतान के लिए उनका बैंक खाता नंबर, बैंक का आईएफएससी कोड और आधार नंबर फीड किया जाता है। इस फीडिंग में कहीं भी एक अंक की गड़बड़ी होने पर ऑनलाइन भुगतान नहीं हो पाता। हालांकि ब्लॉक स्तर पर फीडिंग में गड़बड़ी पर कंप्यूटर स्वयं बता देता है लेकिन कर्मियों की जल्दबाजी में इस पर ध्यान न देने का खामियाजा मजदूरों का भुगतना पड़ता है। इसके बाद लखनऊ में जिस बैंक से भुगतान होना होता है वो इसे रिजेक्ट की श्रेणी में डाल देता है।