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स्मार्ट सिटी बनने की राह में चुनौतियां अपार

Fri, 26 Jun 2015 11:27 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
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मुख्य सचिव आलोक रंजन ने फैजाबाद-अयोध्या शहर को मिलाकर नगर निगम जल्द बनाने की घोषणा की है। इसी के साथ ही केंद्र सरकार इसे स्मार्ट सिटी बनाने का रास्ता खोल सकती है। यूपी के जिन 13 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की बात हो रही है, उसमें फैजाबाद भी शामिल है।
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विज्ञान भवन में दूसरे दिन भी बैठक में शामिल नगर पालिकाध्यक्ष विजय गुप्ता ने इसकी पुष्टि की है। उनका कहना है कि एक लाख आबादी वाले देश के पांच सौ शहरों के अटल योजना में शामिल करने के मानकों में हमारी उपलब्धि 80 फीसदी है, मगर स्मार्ट सिटी बनने के लिए हम काफी पीछे होते हुए भी चुनौती से जूझने को तैयार हैं।

हमने स्मार्ट बिलिंग चार वार्डों में शुरू कर दी है। डबल अकाउंटेंसी, ऑनलाइन कंपलेंट, डोर-टू-डोर कूड़ा निस्तारण आठ कॉलोनियों में करके कदम बढ़ाया है। लेकिन सीवर लाइन, कूड़ा निस्तारण संयंत्र, स्मार्ट बिजली आदि कई क्षेत्रों में हम जीरो हैं।
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नगर पालिकाध्यक्ष स्मार्ट सिटी बनाने की चुनौती भले ही स्वीकार करें, मगर जो मानक केंद्र सरकार ने तय किए हैं, उनमें तो अपना शहर बिल्कुल भी फिट नहीं बैठता। ऐसे में किस तरह से नगर पालिका स्मार्ट सिटी के लिए होने वाली प्रतिस्पर्धा को जीतेगी, ये एक बड़ा सवाल है।

जेएनएनयूआरएम से लेकर ई गवर्नेंस, कूड़ा निस्तारण, वाटर मीटर, ऑनलाइन बर्थ-डेथ सर्टिफिकेट जैसे मसलों पर जुड़वा शहर फिसड्डी ही है। इसके साथ ही मार्ग प्रकाश व्यवस्था, ड्रेनेज और पार्कों और पार्किंग में भी कुछ नहीं हुआ है।

स्मार्ट सिटी के लिए वाटर मीटर लगना अनिवार्य है, जबकि फैजाबाद हो या अयोध्या नगर पालिका परिषद,  दोनों में कहीं भी अब तक वाटर मीटर सिस्टम नहीं शुरू हो सका है। बात यहीं तक खत्म नहीं होती, मांग के अनुरूप जलापूर्ति काफी पीछे हैं। 135 लीटर प्रति व्यक्ति पानी की जरूरत है, जबकि 90 लीटर ही उपलब्ध है।

हालत इतनी खराब है कि करोड़ों खर्च कर बनीं 14  टंकिया निष्प्रयोज्य हैं। इसमें अश्वनीपुरम, चौक, मोदहा, नगर पालिका परिषद, कौशलपुरी आदि अहम कॉलोनियां शामिल हैं। प्यूरीफायर सिस्टम भी बेकार है।

फैजाबाद में 29 वार्डों में सैकड़ों कॉलोनियां है, मगर डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन मात्र आठ कॉलोनी में होने की शुरूआत अभी चंद महीने से हुई है। कूड़ा निस्तारण संयंत्र को लेकर कोई कवायद नहीं दिखती। पालिका के सफाई कर्मी 29 वार्डों में केवल वीआईपी, सिफारिशी या फिर सुविधा शुल्क के नाम पर ही सफाई करते हैं।

नगर पालिकाध्यक्ष स्पष्ट कहते हैं कि सेवा के स्तरों में हमने काफी बढ़ोतरी की है। ऑनलाइन कंट्रोल रूम और शिकायत निस्तारण की व्यवस्था है। इसमें दर्ज होने से लेकर निस्तारण तक हर स्तर पर शिकायतकर्ता को अवगत कराया जाता है। मगर यहां केवल निस्तारण होते हैं, समाधान नहीं। कई बार शिकायत का निस्तारण किए बिना ही शिकायकर्ता को कह दिया जाता है कि समाधान हो गया। कई बार कई-कई दिन तक कोई सुनवाई ही नहीं होती है।

नवाबी शहर फैजाबाद नगर की आबादी तकरीबन साढ़े तीन लाख है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि यहां पर अभी तक सीवर लाइन की व्यवस्था ही नहीं है। लोग अपने घरों में ही सोख्ता बनाकर इस समस्या से निपटते हैं। अयोध्या की आबादी तकरीबन 70 हजार है। अयोध्या में सीवर लाइन का कार्य इन दिनों चल रहा है, लेकिन  यहां पर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माणाधीन है।

बैंकों के गेट-वे के जरिये ऑनलाइन हाउस टैक्स और कॉमर्शियल टैक्स के भुगतान की तैयारी अभी विचाराधीन है। मामला सदन में आ चुका है, मगर इसमें कई समस्याओं को लेकर लटका हुआ है। पालिकाध्यक्ष कहते हैं कि चार वार्डों में लोगों को ऑनलाइन बिल भेजने का काम चल रहा है। धीरे-धीरे हम सभी 29 वार्डों में लागू करेगें।

बिजली की कमी दूर करने के लिए जल्द ही एलईडी बल्ब का वितरण शुरू किया जाना है। इससे बिजली की बचत होगी, लेकिन स्मार्ट एनर्जी इससे कुछ और आगे होगी। केंद्र सरकार बिजली की कमी, सप्लाई में आने वाली बाधाओं, बिजली चोरी और क्षति रोकने के लिए स्मार्ट एनर्जी नीति पर काम करने की योजना बना रही है। इसके तहत 2021 तक देश में 13 करोड़ घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे।

स्मार्ट सिटी बनने पर डिजिटल इंडिया का पूरा खाका लागू होना है, ताकि ऑनलाइन सब कुछ सुलभ हो। पब्लिक सरकारी महकमे से जो काम करवाती है, वह स्मार्ट सिटी में ई-सर्विसेस से होगा। बिजली, पानी के बिल होें या सर्टिफिकेट के लिए धक्के खाने से मुक्ति मिलेगी। तो भ्रष्टाचार भी रुकेगा।


फैजाबाद-अयोध्या में सरकार की ओर से  सार्वजनिक परिवहन की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। सिर्फ कुछ ही रोड पर टेंपो का संचालन होता है  जिसमें देवकाली से बस स्टैंड, सआदतगंज से  रिकाबगंज, चौक होते हुए अयोध्या तक शामिल है। यहां पर सीएनजी से संचालित सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं है।

स्मार्ट ट्रांसपोर्ट की सुविधा होने पर जाम से राहत मिलेगी। नगरीय बस व  टेंपो सेवा की स्थिति में सुधार हो जाएगा। नेशनल इलेक्ट्रॉनिक मोबिलिटी मिशन के जरिए इलेक्ट्रिक वाहन उतारे जाने हैं, जिससे इन दोनों नगरों को  फायदा मिल सकता है।-

स्मार्ट सिटी में स्मार्ट कम्युनिकेशन के लिहाज से ये स्मार्ट फोन सबसे महत्वपूर्ण गैजेट्स साबित होंगे। स्मार्ट सिटी में एडवांस 4जी इंटरनेट और इसके सर्व सुलभ होने से यह संपर्क और मजबूती से बनाने में मदद मिलेगी। जीवन स्तर सुधारने में भी  स्मार्ट कम्युनिकेशन मददगार साबित होगा।

जिले में सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सीय सुविधाओं का अभाव है। एमआरआई,  वेंटीलेटर, लेप्रोस्कोप सर्जरी तथा लीवर व किडनी के ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाएं नहीं है। यहां तक कि घुटना एवं कूल्हे के प्रत्यारोपण के लिए  प्रदेश मुख्यालय की राह  देखनी पड़ती है।

यहीं नहीं मंडल मुख्यालय के चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी भी अखरती है। न्यूरो फिजीशियन, न्यूरो सर्जन, न्यूरोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट जैसे चिकित्सकों की कमी है। ऐसे में दिमागी रूप से परेशान या दिल की गंभीर बीमारी होने पर मरीजों को लखनऊ जाना पड़ता है।

महिलाओं की चिकित्सा का हाल तो बेहद खराब है। अस्पताल  में चिकित्सक ही नहीं है। डाक्टरों के अभाव में मरीजों का कोई दुख-दर्द सुनने वाला ही नहीं है।

जिस धर्मनगरी को स्मार्ट सिटी बनाए जाने की घोषणा हुई है, उस अयोध्या के अस्पतालों का हाल बेहाल है। श्रीराम संयुक्त चिकित्सालय में महिलाओं के  इलाज की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है।
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