अयोध्या। क्षत्रियों की आन, बान व शान माने जाने वाले महाराणा प्रताप की भव्य प्रतिमा अब धर्मनगरी अयोध्या की शोभा बढ़ाएगी। क्षत्रिय समाज के नेतृत्व में राजस्थान के जयपुर में हो रहे इस प्रतिमा निर्माण का कार्य अब लगभग पूरा हो गया है। यह प्रतिमा लखनऊ से अयोध्या के प्रवेश मार्ग सहादतगंज चौराहे पर लगेगी।
अष्टधातु से निर्मित इस मूर्ति का वजन करीब 15 सौ किग्रा है। करीब 16.50 लाख की लागत से हो रहे इस मूर्ति का निर्माण अखिल भारतीय क्षत्रिय कल्याण परिषद करवा रही है। राजस्थान के मशहूर शिल्पकार महावीर भारती की देख रेख में इस मूर्ति का निर्माण हो रहा है। इस मूर्ति का अनावरण बीते 9 मई को महाराणा प्रताप की जयंती पर होना तय था लेकिन कोरोना काल के चलते यह संभव नहीं हो पाया। अब 19 जनवरी 2021 को उनकी पुण्य तिथि पर इस प्रतिमा का अनावरण करने का निश्चय किया गया है।
लखनऊ से अयोध्या के प्रवेश द्वार पर अब महाराणा प्रताप की अष्टधातु की भव्य प्रतिमा लोगों का मन मोह लेगी। अखिल भारतीय क्षत्रिय कल्याण परिषद के जिलाध्यक्ष राजेश सिंह ने बताया कि करीब साढ़े 12 फुट ऊंची इस प्रतिमा पर करीब 16.50 लाख रुपए का खर्च आया है। इस मृर्ति का निर्माण राजस्थान के मशहूर शिल्पकार महावीर भारती कर रहे हैं, उन्होंने इसके लिए महाराणा प्रताप के बारे में अध्ययन किया, जिससे ज्ञात हुआ कि उनकी लंबाई करीब साढ़े सात फिट थी, इसको ध्यान में रखकर इस मृर्ति का निर्माण किया गया है।
बताया कि इसकी साज सज्जा का काम निर्मला कुलहरी ने किया है, लॉकडाउन के दौरान मुंबई में रहते हुए उन्होंने ऑनलाइन मूर्ति की डिजाइन तैयार की, जिसको अमलीजामा महावीर भारती ने पहनाया। बताया कि इस भव्य मूर्ति निर्माण के संयोजक डा. अजय प्रताप सिंह हैं। बताया कि पहले इस मृर्ति की स्थापना महाराणा प्रताप की जयंती 9 मई को करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन कोरोना काल के चलते यह संभव नहीं हो सका। अब उनकी पुण्यतिथि 19 जनवरी 2021 को इस मूर्ति का अनावरण कराया जाएगा, इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित किया जाएगा। बताया कि इस मूर्ति की स्थापना के लिए लिए पीडब्ल्यूडी व नगर निगम ने एनओसी दे दी है।
इस प्रतिमा की खासियत है चेतक (घोड़े) पर बैठे महाराणा प्रताप, अब तक बनी महाराणा प्रताप की प्रतिमा से ये कुछ अलग है। इसमें उनके कद के अनुरूप उन्हें विशालकाय बनाया गया है। अन्य प्रतिमा के मुकाबले इस प्रतिमा में उनका चेहरा दोगुना बड़ा है, इसी के अनुसार चेतक का भी निर्माण किया गया है। इसको देखकर लगता है कि महाराणा प्रताप बख्तरबंद पहनकर चेतक पर सवार होकर युद्ध के लिए निकले हैं। उनके एक हाथ में चेतक की लगाम तो दूसरे हाथ में दो धारी तलवार है, साथ ही एक तरफ भाला भी लगाया गया है।