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परिवार से दूर होकर कर्तव्य निभा रहे धरती के भगवान

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अयोध्या। कोरोना वायरस की दूसरी लहर से एक ओर जहां लोग घर से बाहर निकलने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सक कम संसाधनों के बीच भी घर-परिवार से दूर होकर, सिर पर कफन बांधकर अपना कर्तव्य निभाते हुए मानव सेवा में जुटे हुए हैं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर वार्डों तक चिकित्सक, स्टाफ नर्स व अन्य कर्मियों के जज्बे को सलाम न किया जाय तो इंसानियत के साथ शायद बेमानी होगी।
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कोरोना की दूसरी लहर ने जिले में खूब तबाही मचाई है। पिछले कई दिनों से लॉकडाउन घोषित होने के बाद व संक्रमण के खौफ में लोग किसी तरह जिंदगी गुजार रहे हैं और बिना कार्य के घर से बाहर निकलने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। कोविड अस्पतालों में मरीजों की भीड़ तो जमा ही है, नॉन कोविड अस्पताल भी मरीजों से फुल चल रहे हैं। दूसरी लहर में अधिकांश मरीज कोरोना के गंभीर लक्षणों से ग्रसित हैं, लेकिन उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है। ऐसे मामले जिला अस्पताल में भेजे जा रहे हैं, जहां मरीजों की एचआर सीटी कराने के बाद संक्रमण की पुष्टि हो रही है। आईपीडी में यहां प्रतिदिन करीब 40-50 मरीज तक पहुंच जा रहे हैं, जिनका इलाज कम संसाधनों में करना चुनौतीपूर्ण है। फिर भी मानव सेवा के प्रति अपने कर्तव्यों को बखूबी निभाते हुए यहां के चिकित्सक, स्टाफ नर्स व अन्य स्वास्थ्यकर्मी मजबूती से निभा रहे हैं। गंभीरता तक पहुंचने वाले कुछ मरीजों की इलाज के दौरान जान भी चली जा रही है, लेकिन अधिकांश मरीज स्वस्थ होकर घर भी लौट रहे हैं।
क्या कहते हैं कोरोना योद्घा
परिवार से खुद को किया है अलग
प्रतिदिन काफी संख्या में मरीज कोरोना जैसे लक्षणों को लेकर भर्ती हो रहे हैं। स्टाफ भी कम है, लेकिन दिन-रात ड्यूटी करके किसी तरह कार्य चलाया जा रहा है। खुद के संक्रमित होने का लगातार खतरा बना है, इसलिए परिवार से खुद को अलग किया है। इस बुरे दौर से निकलने के लिए हर किसी को आगे आना चाहिए और लोगों की हर संभव मदद करना चाहिए।
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-डॉ. रामकिशोर, फिजीशियन, जिला अस्पताल
छोटा बच्चा है, दूर से ही मिलते हैं
घर में करीब साढ़े तीन साल का बेटा है। इमरजेंसी से लेकर भर्ती मरीजों तक का उपचार करने की वजह से हमेशा हाई रिस्क पर चल रहे हैं। इसलिए घर पहुंचने पर बेटे से दूर से ही मुुलाकात कर लेते हैं व अन्य एहतियात बरत रहे हैं। यह संकट की घड़ी है, इससे उबरने के लिए एकजुट होना पड़ेगा। हर कोई अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन करे तो कोरोना से जीत आसान होगी।
-डॉ. आशीष श्रीवास्तव, आर्थो सर्जन, जिला अस्पताल
मरीजों की उम्मीदों पर खरा उतरने का कर रहे प्रयास
रेगुलर ईएमओ पॉजिटिव हो गई है, इसकी वजह से इमरजेंसी ड्यूटी लगातार चल रही है। अस्पताल में लोड बढ़ गया है। संसाधन भी कम है, ऐसे में उपचार करना और चुनौतीपूर्ण हो गया है। मरीजों को बचाना भी है, इसलिए उनके संपर्क में अधिक रहने से संक्रमण का खतरा बना रहता है। हमारी पहचान मरीजों से ही है, आज उन्हें हमारी जरूरत ज्यादा है, उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास किया जा रहा है।
-डॉ. आरबी वर्मा, चर्म रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
सुरक्षा को ध्यान में रखकर मां का भी निभा रही फर्ज
यहां पहुंचने वाले अधिकांश मरीज या तो संक्रमित हैं या कोरोना के लक्षणयुक्त हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में जुड़े होने के कारण उनका उपचार करना प्राथमिकता है। लगातार संक्रमण का खतरा है, एक छोटा बच्चा भी है, उसकी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए मां का भी फर्ज निभा रहे हैं।
-अर्पिता गोस्वामी, स्टाफ नर्स
संक्रमण को भगाने के लिए जनता भी हो जागरूक
-संक्रमण चरम पर है, ऐसे में हमारी जिम्मेदारी अपने आप बढ़ गई है, जिसे पूरा करने का हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। लेकिन जनता को भी संक्रमण भगाने के लिए जागरूक रहना चाहिए। सब मिलकर ही इस महामारी से जंग जीत सकते हैं।
-हिना परवीन, स्टाफ नर्स
जिम्मेदारी बढ़ी है तो करेंगे निर्वहन
-चिकित्सा अधीक्षक होने के कारण इन दिनों जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ी है। वार्ड में सांस फूलने व अन्य लक्षणों के अधिक मरीज हैं, अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए दिन-रात ऑनकाल भी उपस्थित हो रहे हैं। उम्मीद है कि नया सवेरा शीघ्र होगा।
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-डॉ सत्येंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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