जांच में सामने आया कि उसी का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज था, जबकि जीती बीडीसी का नहीं। इस घटना को लेकर रिटर्निंग अधिकारी बीएसए के साथ एसडीएम से भी शिकायत हुई, लेकिन सब असहज रहे। अब प्रशासन का कहना है कि कोई लिखित शिकायत न मिलने से कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल यह उठता है कि हारी बीडीसी का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज करने के लिए दोषी कौन है?
सोहावल ब्लॉक में कुल 106 बीडीसी वोटर थे, सुबह 11 बजे मतदान शुरू हुआ। मतदाता सूची के क्रमांक 78 पर गीता पत्नी सुग्रीव वर्मा का नाम दर्ज था, जबकि वह कलाफरपुर सीट से इसबार चंद्रावती पत्नी नंदकुमार से हार गई थीं। जब चंद्रावती अपना जीत का प्रमाणपत्र लेकर वोट देने कक्ष में पहुंची तो पता चला कि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, जिसका नाम उनकी सीट से है, उसका वोट पड़ गया है।
बैरंग लौटीं बीडीसी सदस्य चंद्रावती ने जैसे ही हकीकत बताई हड़कंप मच गया। निर्दल प्रत्याशी फिरदौस खान समेत गब्बर खान आदि ने मामले की शिकायत आरओ व बीएसए प्रदीप कुमार द्विवेदी से की। मामले में सपा की मिलीभगत का आरोप लगाया।
साथ ही एसडीएम अमित कुमार से भी मिलकर वोट दिलाने की मांग की गई। दोनों अधिकारियों ने मतदाता सूची में नाम न होने की दलील देते हुए मांग खारिज कर दी। अंतत: चंद्रावती वोट देने से वंचित रह गईं।
सोहावल के एसडीएम अमित कुमार ने बताया कि कोई लिखित शिकायत न आने कोई कार्रवाई नहीं की गई है। शिकायत आती है तो मामले की जांच की जाएगी कि कैसे हारी हुई महिला का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज हुआ है।