प्रधान की पत्नी समेत सात अपात्रों को इंदिरा आवास का आवंटन कर दिया गया। इनको पहली किश्त भी जारी कर दी गई। जांच में इसका खुलासा हुआ तो हलचल मच गई।
डीएम ने तत्कालीन खंड विकास अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए हैं। जांच के बाद पैसा ले चुके लाभार्थियों से वसूली के साथ अन्य कार्रवाई भी हो सकती है।
मामला मवई के मानापुर गांव का है। बताया गया है कि लोहिया आवासों के चयन में कुछ इस तरह खेल किया गया कि गांव के प्रधान जगन्नाथ की पत्नी के साथ ही उनके दो करीबियों और चार अन्य अपात्रों के नाम का चयन कर दिया गया।
हालांकि अभी सभी नामों का खुलासा नहीं किया गया। लेकिन यह सभी चयन मानक के खिलाफ किए गए। चयन के बाद इसकी सूची जिला मुख्यालय को भेज दी गई। मुख्यालय में इसकी स्क्रीनिंग के बाद इन सभी लाभार्थियों को 50-50 हजार रुपये की पहली किश्त भी जारी कर दी गई।
इसके बाद चेकिंग के दौरान जिला विकास अधिकारी अभिराम त्रिवेदी ने मानापुर गांव के चयनित तीन लाभार्थियों का मामला पकड़ लिया। यह तीनों अपात्र पाए गए। उन्होंने जांच में तीन अपात्रों के चयन की बात स्वीकार की है।
इसके बाद गांव के लाभार्थियों के नए सिरे से पड़ताल कराई गई, तो चार अन्य लाभार्थी भी अपात्र की श्रेणी में पाए गए। सूत्रों की मानें तो लाभार्थियों का चयन ग्राम पंचायत से नहीं किया गया। बल्कि खंड विकास अधिकारी के स्तर से ही सूची भेज दी गई। जांच में इसका भी खुलासा हुआ।
अब जिलाधिकारी ने संबंधित जिला ग्राम्य विकास अभिकरण को तत्कालीन खंड विकास अधिकारी विजय शंकर से स्पष्टीकरण मांगे जाने का निर्देश दिया है। बीडीओ से स्पष्टीकरण मांगे जाने के साथ ही लाभार्थियों से भेजी गई रकम की वसूली की कार्रवाई हो सकती है।