अयोध्या। लॉकडाउन में काम-धंधा बंद होने से परदेस में रह रहे लोगों के सामने अब खाने का संकट खड़ा हो गया है। लोग तरह-तरह के जतन कर अपने घर को वापस आने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
बीकापुर के सूल्हेपुर निवासी सुभाष वर्मा 17 दिनों की पैदल यात्रा कर मंगलवार शाम अपने घर पहुंचे। वहीं, हरियाणा के जींद से साइकिल से यात्रा कर 8 युवक मंगलवार दोपहर बीकापुर कस्बे में पहुंचे। जिसमें 6 युवक अतरैला रीवा और दो युवक गोसाईगंज सुल्तानपुर के निवासी हैं।
सूल्हेपुर निवासी सुभाष ने बताया कि वह हुलास नगर मुंबई में सिलाई का काम करता है। लॉकडाउन के कारण कामधंधा बंद होने से खाने की दिक्कत होने लगी। सवारी वाहन और ट्रेन न चलने से वह पैदल ही घर के लिए निकल पड़ा।
17 दिन की पैदल यात्रा करके बीकापुर पहुंचा है। बताया कि यात्रा के दौरान उसके साथ बस्ती जनपद और अन्य जिलों के भी करीब 2 दर्जन लोग पैदल अपने अपने घर आए हैं। रास्ते में कुछ जगह पर ट्रक और सरकारी बस से भी कुछ दूरी तक यात्रा हुई है। लेकिन ज्यादातर सफर पैदल तय हुआ है। घर आने के बाद बुधवार सुबह सुभाष सीएचसी बीकापुर पहुंचा, वहां स्वास्थकर्मियों द्वारा हाथ में मोहर लगाकर 21 दिनों के लिए होम क्वारंटीन के लिए कहा गया।
वहीं, हरियाणा के जींद से साइकिल से यात्रा कर 8 युवक मंगलवार दोपहर बीकापुर कस्बे में पहुंचे। जिसमें 6 युवक अतरैला रीवा और दो युवक गोसाईगंज सुल्तानपुर के निवासी हैं।
अतरैला रीवा प्रयागराज के निवासी रामप्रकाश, अर्जुन, लल्लन कुमार रावत, राहुल कुमार, सुभाष, राजा और गोसाईगंज सुल्तानपुर के अजय कुमार और सुजीत कुमार ने बताया कि हम सभी लोग जींद में एक फ्लोर मिल में काम करते हैं। लॉकडाउन के कारण कामधंधा बंद हो गया। किसी तरह एक माह का समय व्यतीत किया।
उसके बाद सभी लोगों को साइकिल से घर के लिए निकल पड़े। रास्ते में काफी दिक्कतें हुई। सोने को नहीं मिला। भूखे भी रहना पड़ा। कस्बे में ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों ने सभी युवकों को आश्रय स्थल भारती इंटर कॉलेज में पहुंचाया। वहां कम्युनिटी किचन में भोजन करने के बाद सभी युवक साइकिल से आगे के सफर के लिए रवाना हो गए।