अयोध्या। कार्तिक मेले का दूसरा चरण गुरुवार को पंचकोसी परिक्रमा के साथ शुरू हो गया। पंचकोसी परिक्रमा का शुभ मुहूर्त गुरुवार रात 8:30 बजे से था लेकिन भक्तों ने मुहूर्त से करीब डेढ़ घंटे पूर्व ही सात बजे से परिक्रमा शुरू कर दी।
जैसे-जैसे रात सघन होती गई, आस्था का पथ भी भक्तों की भीड़ से सघन होता गया। पूरी रात रामनगरी की आध्यात्मिक परिधि भक्तों के जयकारों से गूंजती रही।
देवोत्थानी एकादशी पर पांच कोस की परिधि में आस्था का पग नापने गुरुवार को लाखों भक्त उमड़ पड़े। संपूर्ण अयोध्या नगरी जय श्रीराम, जय सरयू मैया के जयकारों से गुंजायमान हो रही थी।
एक ओर जहां परिक्रमा पथ पर श्रद्धालुओं का प्रवाह बढ़ता जा रहा था तो वहीं दूसरी ओर परिक्रमा पूर्ण करने वाले श्रद्धालु सरयू स्नान से लेकर अपने आराध्य की चौखट पर माथा टेकने को उमड़ रहे थे। पूरी रात परिक्रमा की धूम रही।
रामनगरी में उदयातिथि की मान्यता है इसलिए बहुत सारे साधु-संत चार नवंबर की सुबह से परिक्रमा का श्रीगणेश करेंगे। इससे पूर्व गुरुवार की शाम श्रद्धालुओं ने पावन सलिला सरयू में डुबकी लगाई और परिक्रमा पथ पर निकल पड़े।
उदया चौराहा, नयाघाट, रामघाट, बूथ नंबर चार, हलकारा का पुरवा चौराहा आदि स्थलों से भक्तों ने धरती मां को शीश नवाकर परिक्रमा शुरू की। आधी रात तक परिक्रमा पथ भक्तों से पट गया था।
परिक्रमा शुक्रवार की शाम 6:43 बजे तक संचालित होगी। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, रामनगरी में वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
रामनगरी में तीन प्रकार की परिक्रमा सदियों से प्रचलित है। इन सभी परिक्रमा का शास्त्रीय महत्व भी है। इसमें सांस्कृतिक परिधि की 84 कोसी परिक्रमा, आध्यात्मिक परिधि की 14 कोसी परिक्रमा और धार्मिक परिधि की पांच कोसी परिक्रमा शामिल है।
84 कोसी परिक्रमा जहां अयोध्या सहित पांच जिलों से होकर गुजरती है। जबकि 14 कोसी परिक्रमा अयोध्या-फैजाबाद की परिधि में होती है। वहीं पांच कोसी परिक्रमा अयोध्या धाम की परिधि में होती है।