गुरुवार को रामकथा संग्रहालय में जांच करती जस्टिस विष्णु सहाय आयोग की टीम।
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गुमनामी बाबा कौन थे? प्रकरण की जांच कर रहे जस्टिस विष्णु सहाय आयोग ने गुरुवार को यहां कैंप कार्यालय पर सुनवाई की। वरिष्ठ पत्रकार शीतला सिंह ने अपना बयान दर्ज कराया, साथ ही कई साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिससे गुमनामी बाबा कहीं से भी नेताजी सुभाषचंद्र बोस नहीं पाए गए।
उन्होंने कोलकाता तक की अपनी यात्रा के साथ तत्कालीन एसएसपी कर्मवीर सिंह की ओर से नियुक्त दरोगा की ओर से नेताजी के परिवार से लिए गए बयान का भी जिक्र किया, जिसमें गुमनामी बाबा को नेताजी होने से इंकार किया गया है।
प्रदेश सरकार से गुमनामी बाबा उर्फ भगवन जी की पहचान के लिए एक सदस्यीय जस्टिस विष्णु सहाय आयोग गुरुवार को यहां सैनिक कल्याण कार्यालय में स्थित कैंप कार्यालय में सुनवाई की। जस्टिस सहाय के समक्ष वरिष्ठ पत्रकार शीतला सिंह ने अपना बयान दर्ज कराया।
उन्होंने अखबार में छपी खबरों के हवाले से अपने कथन को रखा। उन्होंने अपने लेखों और तथ्यों के हवाले से गुमनामी बाबा का सुभाष चंद्र बोस से कोई लेना-देना नहीं होने की बात कही और पांच पेज का बयान दर्ज कराया।
बयान दर्ज किए जाने के बाद आयोग ने अयोध्या के राम कथा संग्रहालय में रखे गुमनामी बाबा उर्फ भगवन जी के सामानों का निरीक्षण किया। बताया गया है कि आयोग ने यहां रखे दो बक्सों के सामानों को निकलवा कर देखा। इन दो बक्सों से दो रिकार्ड प्लेयर, रेडियो, खरल, इमाम दस्ता, क्राकरी सेट, थरमस, रुद्राक्ष की माला, टॉर्च जैसे अन्य सामान देखे गए। लगभग चार घंटे की कार्रवाई करने के बाद आयोग लखनऊ लौट गया।