अयोध्या। रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य व दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने सोमवार को कहा कि वर्ष 2002 में रामजन्मभूमि न्यास के तत्कालीन अध्यक्ष परमहंस रामंचद्र दास जी महाराज द्वारा पूजित राम शिलाओं से ही राममंदिर की आधारशिला रखी जाएं। राममंदिर की नींव में इन शिलाओं का प्रयोग होना चाहिए। उन्होंने बताया कि जिला कोषागार में सुरक्षित रखी हुईं रामशिलाओं को प्रशासन से वापस मांगा गया है ताकि इनका प्रयोग राममंदिर निर्माण में किया जा सके।
महंत सुरेश दास बताते हैं कि 2002 में दिगंबर अखाड़ा में महंत रामचंद्र दास परमहंस की अगुवाई में शिलापूजन एवं शिलादान का कार्यक्रम किया गया था। 15 मार्च 2002 को श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष परमहंस जी महाराज तथा विहिप के महामंत्री अशोक सिंहल के नेतृत्व में हजारों कार्यकर्ताओं ने रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण कार्यशाला से राम शिलाएं उठाकर दिगंबर अखाड़ा ले आए।
जहां पर रामशिलाओं की पूजा अर्चना की गई इसके बाद पूजित शिलाओं को केंद्र सरकार के प्रतिनिधि शत्रुघ्न सिंह को परमहंस जी ने सौंप दिया, जो कि जिला कोषागार में आज भी सुरक्षित हैं। इन्हीं शिलाओं का प्रयोेग राममंदिर की आधारशिला में होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि परमहंस जी राममंदिर आंदोलन के महानायक थे। 22/23 दिसंबर की रात 1949 में रामजन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह में रामलला का प्राकट्य हुआ था। इससे पूर्व श्रीरामलला जन्मभूमि स्थल को मुस्लिम हस्तक्षेप से मुक्त कराने के उद्देश्य से 1949 में रामजन्मोत्सव के दिन से ही अयोध्या में भी जगह-जगह श्रीरामनाम संकीर्तन एवं मानस पाठ अनवरत एवं अखंड रूप से प्रारंभ हो गया।
यहां तक कि श्रीरामजन्मभूमि मंदिर के प्रवेश द्वार पर भी अखंड संकीर्तन चलने लगा। जिसका नेतृत्व परमहंस जी महाराज व उनके सखा संतों ने स्वंय किया था। उन्होंने कहा कि राममंदिर के लिए ट्रस्ट निर्माण की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। ट्रस्ट में राममंदिर आंदोलन से जुड़े संतों को भी स्थान मिलना चाहिए। कहा कि अयोध्या में बनने वाला राममंदिर दिव्य-भव्य व अलौकिक होगा।