अयोध्या। रामनगरी सावन झूलनोत्सव के उल्लास में लीन हो चुकी है। मठ-मंदिरों में गीत-संगीत व अध्यात्म की त्रिवेणी प्रवाहमान हो रही है तो वहीं रामलला के दरबार में भी सोमवार से सावनी छटा बिखरने लगी है। श्रावण शुक्ल पंचमी पर प्रधान अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास शास्त्री ने सुबह सात बजे विधि-विधान से पूजन-अर्चना के साथ रामलला सहित चारों भाईयों को रजत हिंडोले पर विराजित किया। अब सावन पूर्णिमा तक रामलला भक्तों को रजत हिंडोले पर विराजमान होकर दर्शन देंगे।
सावन के उत्सव को लेकर रामलला के गर्भगृह को फूलों से सजाया गया है। सोमवार सुबह मंदिर का पट खुलते ही भक्त रामलला के दर्शन को उमड़ पड़े। मुख्य अर्चक सत्येंद्र दास ने बताया कि 2021 में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से चांदी का झूला निर्मित कराया गया था। पांच फीट ऊंचे झूले पर इस बार भी परंपरा के अनुसार श्रावण शुक्ल पंचमी पर रामलला सहित चारों भाईयों को विराजित कर झूला महोत्सव का श्रीगणेश सोमवार से किया गया है।
सत्येंद्र दास ने बताया कि झूले पर रामलला को विराजित करते ही उन्होंने सबसे पहले आराध्य को झूला झुलाया। साथ ही पंचमी पर रामलला को पूड़ी, सब्जी, कचौड़ी, खीर, मिष्ठान, फल आदि का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया गया। शाम को गर्भगृह परिसर में सांस्कृतिक संध्या भी सजी। कजरी गूंजी तो पूरे परिसर की आध्यात्मिक आभा चरम पर दिखी। राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ़ अनिल मिश्र, एसपी सुरक्षा पंकज पांडेय सहित अन्य ने रामलला को झूला विहार कराया।
31,525 भक्तों ने लगाई हाजिरी
सावन मास की पंचमी तिथि पर रामलला के दरबार में 31,525 भक्तों ने हाजिरी लगाई। पहली पाली में 14,120 भक्तों ने रामलला के दर पर माथा टेका तो दूसरी पाली में 17,405 भक्त दर्शन-पूजन को पहुंचे। रामलला की संध्या आरती में शामिल होने के लिए भी भक्तों में होड़ रही। सुल्तानपुर निवासी 70 वर्षीय जगदंबा सिंह व दिल्ली से सपरिवार आए संजय अग्रवाल ने कहा कि रामलला के झूला विहार का दर्शनप्राप्त कर सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। मंदिर निर्माण का भी साक्षी बनने का अवसर प्राप्त हुआ, जीवन धन्य हो गया।
वेंकटेंश मंदिर में छाया झूलनोत्सव का उल्लास
अयोध्या। रामनगरी के शास्त्री नगर में स्थित प्राचीन वेंकटेंश मंदिर में भी झूलनोत्सव की छटा बिखर रही है। यहां भादौ कृष्ण तृतीया तक झूलनोत्सव की परंपरा है। अन्य मंदिरों में सावन पूर्णिमा 30 अगस्त को महोत्सव को विराम मिलेगा जबकि यहां 2 सितंबर तक झूलनोत्सव का आयोजन होगा। श्रीझालरिया मठ बड़ा स्थान डीडीवाना की शाखा वेंकटेश मंदिर में झूलनोत्सव का शुभारंभ जगद्गुरू स्वामी घनश्यामाचार्य के सानिध्य में हुआ। पुजारी रामसंवारे पांडेय ने बताया कि मंदिर में झूलनोत्सव की परंपरा करीब दो सौ वर्ष पुरानी है।