अफसरों की आपस की लड़ाई में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का बंटाधार हो रहा है। इसका सीधा असर प्रसूताओं की सेहत पर पड़ रहा है। प्रसूताओं को जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है जबकि सरकारी खजाने में लाखों रुपया डंप है।
जननी सुरक्षा योजना के तहत एक अप्रैल से नए नियम लागू कर दिए गए। अब प्रसूताओं को चेक के बजाए सीधे तौर पर उनके खाते में धनराशि भेजी जानी है। सबसे ज्यादा दिक्कतें नव विवाहिताओं के सामने आ रही है। नव विवाहिता तो मातृत्व सुख के लिए मानसिक रूप से तैयार हो रही हैं।
सरकारी योजनाओं के बारे में उन्हें जानकारी नहीं हो पा रही है। प्रसव के बाद जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को एक हजार चार सौ और शहरी क्षेत्र की महिलाओं को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के तौर पर दिए जाते हैं। शासनादेश के तहत यह धनराशि सीधे तौर पर लाभार्थी के खाते में भेजनी है। खाता नहीं खुले होने की वजह से प्रसूताओं के खाते में धनराशि का हस्तांतरण नहीं हो पा रहा है।
जिले में बैंकों में खाता न होने के कारण पांच हजार 897 महिलाओं के खाते में जेएसवाई की धनराशि नहीं भेजी गई है। जबकि गांव और शहर के अस्पतालों में दस हजार से अधिक महिलाओं का प्रसव हुआ दर्शाया गया है। यही कारण है कि प्रगति रजिस्टर में जन्म दर जिस अनुपात में अंकित है उस अनुपात में प्रसूताओं को जेएसवाई का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
प्रसूताओं का सरकारी खजाने में 82 लाख 55 हजार आठ सौ रुपया है, लेकन प्रसूताओं का बैंक एकाउंट न होने की वजह से धन का हस्तांतरण नहीं हो पा रहा है। जिले में सबसे खराब स्थिति मवई, मिल्कीपुर, सोहावल और खंडास सीएचसी की है।
शासनदेश के तहत प्रसूतओं के खाते में ही प्रोत्साहन राशि भेजी जानी है। जिस प्रसूता के पास बैंक में खाता नहीं होता है उस प्रसूता के खाते में प्रोत्साहन राशि नहीं भेजी जा रही है। - डॉ. राधेश्याम यादव मुख्य चिकित्साधिकारी