अयोध्या और फैजाबाद में कई साल तक जिंदगी बिताने वाले गुमनामी बाबा उर्फ भगवन जी ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस थे। यह दावा है गोंडा के रहने वाले 90 वर्षीय अयोध्या प्रसाद गुप्त का। वह गुमनामी बाबा की असलियत की जांच कर रहे जस्टिस विष्णु सहाय आयोग के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने मंगलवार को यहां पहुंचे थे।
आयोग के सामने दो अन्य लोगों ने भी बयान दर्ज कराए। आयोग के सचिव व पूर्व जिला जज दिलीप कुमार ने बताया कि गोंडा जिले के ग्राम व पोस्ट बड़गांव निवासी श्री गुप्त ने आयोग के समक्ष दिए गए अपने बयान में कहा कि वह नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नेतृत्व वाली आजाद हिंद फौज के सिपाही थे। 16 वर्ष की आयु में वह इस फौज में भर्ती हुए थे।
उस समय नेताजी की आयु करीब 32 वर्ष थी। उन्होंने आयोग के सामने अपनी कई स्मृतियों पर भी चर्चा की। अपने को आजाद हिंद फौज का सेनानी बताने वाले श्री गुप्त ने आयोग को बताया कि वह गुमनामी की जिंदगी जीने के दौरान नेताजी सुभाषचंद्र बोस से नैमिषारण्य के साथ अयोध्या, फैजाबाद में भी कई बार मिल चुकें हैं।
उनके साथ रसगुल्ले खाए हैं। कॉफी पी चुके हैं। उनका कहना था कि नेताजी की इच्छा थी किताब लिखी जाए। उनकी इच्छापूर्ति के लिए ही उन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस नामक पुस्तक लिखी है। बताया कि मुखर्जी आयोग के सामने अपना बयान दर्ज कराने के लिए वह कोलकाता भी गए थे।
आयोग के समक्ष बयान दर्ज कराने वालों में फैजाबाद के रवींद्रनाथ शुक्ल और अशोक टंडन भी थे। अशोक ने आयोग को बताया कि वह नेताजी से मिले नहीं है लेकिन अपनी रिसर्च के आधार उनका मानना है कि गुमनामी बाबा ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस थे।
रवींद्रनाथ ने आयोग के समक्ष बताया कि वह गुमनामी बाबा के यहां प्रवास के दौरान आते-जाते थे। उनका कहना था कि गुमनामी बाबा ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस थे। इसके साथ ही गुमनामी बाबा के कुछ सामानों के साथ वीडियोग्राफी भी आयोग के पास जमा की गई।
आयोग के सचिव के मुताबिक, जांच आयोग ने अब तक कुल 11 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। पांच नवंबर को लखनऊ स्थित कार्यालय में अगली कार्यवाही की जाएगी।