नगर पालिका के तिलक हाल में बुधवार को हुई बोर्ड बैठक में जमकर हंगामा हुआ। ठेकों की मंजूरी और प्रकाश विभाग में उपकरणों की खरीद को लेकर सभासदों के बीच तीखी तकरार हुई।
भाजपा की सभासद अशोका द्विवेदी ने प्रचार पट ठेका 2013-2014 में 18 लाख के सापेक्ष महज छह लाख में दिये जाने का जमकर विरोध किया तो सपा की सभासद मुस्कान सावलानी ने प्रकाश विभाग में उपकरणों की खरीद अधिक दर पर किये जाने का मुद्दा उठाया।
मगर एकजुट भाजपा और सपा सभासदों ने दोनों ही महिलाओं की खिलाफत की। उन्हें पालिका की आय बढ़ाने में विरोधी और नगर के विकास में बाधक तक कह डाला। इसके बाद हंगामेे के बीच सभासदों ने इनका विरोध दर्ज करके ठेकों व खरीद को मंजूरी दे दी।
बोर्ड बैठक में पिछली कार्यवाही पर पुष्टि में प्रकाश विभाग में उपकरणों की खरीद का मामला उठा। मुस्कान सावलानी ने कंपनी का रेट बाजार दर से कहीं अधिक होने पर आपत्ति जताते हुए रेट लिस्ट देने को कहा।
उनके इतने कहते ही सपा और भाजपा के रामभवन यादव, दीपक जायसवाल, मिथिलेश द्विवेदी, शकुंतला गौतम, संग्राम सिन्हा, जय सिंह छोटे, जयनारायण सिंह, अनिल सिंह हंगामा करने लगे।
उन्हें विकास विरोधी कहते हुए कहा कि पिछले डेढ़ साल से इनकी आपत्ति से जरूरी सामानों की खरीद रुकी है। वार्डों में अंधेरा है। उन्हें विकास चाहिए अध्यक्ष जी! इनकी आपत्ति दर्ज की जाये और आये कंपनी रेट से सामान मंगाया जाये। यह रेट लिस्ट नेट से लें।
प्रचार पट ठेके को लेकर भाजपा की अशोका द्विवेदी का कहना था कि मामला अदालत में जाने से पूर्व 2013-14 में इसका ठेका 18 लाख रुपये से अधिक में हुआ था। ऐसा क्या हुआ कि अब ठेका छह लाख से कुछ अधिक में दिया जा रहा है।
दूसरे सभासदों ने तीसरी बार टेंडर पड़ने को कहते हुए अशोका द्विवेदी का विरोध दर्ज कर इसे भी मंजूरी दे दी। खोवा मंडी चौक तथा साइकिल-स्कूटर स्टैंड का ठेका निगोसिएशन के बाद देने पर सहमति बनी।
सभी वाहन स्टैंडों, सब्जी मंडी लालबाग, मछली मंडी नियांवा, कार-स्कूटर पार्किंग चौक के ठेके भी मंजूर हो गये। शासन की ओर से डूडा द्वारा नगर में ठेकेदार, श्रमिक, सफाईकर्मी, बिजली, मिस्त्री, ऑपरेटर और प्लंबर देने पर भी सभासदों ने हंगामा किया।
ईओ रविशंकर शुक्ल तथा चेयरमैन विजय कुमार गुप्त ने हंगामा कर रहे सभासदों को बताया कि डूडा सिर्फ लेबर देगा। नगर पालिका कार्यों की मॉनीटरिंग करेगी। भुगतान सभासदों की संतुष्टि के बाद होगा। इस पर सभासद शांत हो गये। विशाल पाल, धर्मेंद्र कनौजिया, कमलेश सोलंकी, सुलेमान भी विभिन्न मुद्दों पर उलझते रहे।