प्रमुख सचिव कृषि एके विश्नोई ने प्रदेश के 13 जिलों की हरित क्रांति योजना की समीक्षा बैठक सोमवार को कृषि भवन के सभा कक्ष में की। यह वह जिले हैं, जिनमें धान का उत्पादन पिछले वर्ष अपेक्षाकृत कम पाया गया। प्रमुख सचिव ने धान की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि विभाग के अफसरों से उनके जिलों में कार्य करने में आ रहीं कठिनाइयों को जाना और मृदा परीक्षण कार्यक्रम धरातल पर नहीं उतारा, इसके लिए प्रदेश स्तरीय एक अफसर को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि अब ऐसी विसंगति पैदा नहीं होगी। तानाशाह अधिकारी को हटा दिया गया।
प्रदेश के धान उत्पादक क्षेत्र इलाहाबाद, कौशांबी, चंदौली, सोनभद्र, कुशीनगर, बस्ती सिद्धार्थनगर, महराजगंज, अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, बाराबंकी, अमेठी, श्रावस्ती जिलों की समीक्षा थी। इन जिलों के उप निदेशक कृषि को बैठक में बुलाया गया था। अधिकारियों को हर हाल में धान की उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। प्रमुख सचिव ने कहा कि कृषि तकनीकी का इस्तेमाल करें।
किसानों को आधुनिक खेती की जानकारी दें, ताकि जिन हरित क्रांति योजना से आच्छादित इन जिलों में किसी अनाज की उत्पादकता सबसे अधिक हो। उन्होंने बताया कि योजनाओं को और लचीला बनाया जा रहा है। अब किसान किसी भी फर्म से उपकरण खरीदें, उन्हें अनुदान मिलेगा।
मृदा परीक्षण कार्यक्रम इस वर्ष नहीं संचालित हो सका। इसके लिए प्रमुख सचिव ने कृषि विभाग के प्रदेश स्तरीय एक अफसर को जिम्मेदार बताया। कहा कि संयुक्त कृषि निदेशक शोध एवं मृदा सर्वेक्षण को उनके पद से हटा दिया गया है। अब भविष्य में ऐसी विसंगति नहीं पैदा होगी।
इस अवसर पर संयुक्त कृषि निदेशक डॉ. ओपी सिंह, उप निदेशक कृषि टीपी चौधरी, संयुक्त निदेशक भूमि संरक्षण योगेश प्रताप सिंह, जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार यादव, जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी, भूमि संरक्षण अधिकारी डा. राजमंगल चौधरी आदि मौजूद रहे।