राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आशीर्वाद) योजना में बच्चों की सेहत सुधारने में बड़े पैमाने पर सरकारी धन की बंदरबांट की गई। ऑडिट टीम ने जिले में हुआ घोटाला पकड़ा है। रिपोर्ट शासन में पहुंची तो प्रदेश मुख्यालय पर अधिकारियों के होश उड़ गए।
प्रदेश मुख्यालय के राज्य कार्यक्रम प्रबंधन इकाई के अधिकारी गुरजीत सिंह कल्सी ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में वाहनों की निविदा फाइल, भुगतान बिल और लॉगबुक का विस्तृत ब्यौरा तलब किया है। शासन ने हर हाल में तीन अगस्त रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया।
शासन का पत्र आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपने को असहज महसूस कर रहे हैं। बीते वर्ष में वाहनों को हायर और भुगतान करने की जिम्मेदारी एनआरएचएम के नोडल अधिकारी डा. एके कनौजिया के जिम्मे थी।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्कूली बच्चों की सेहत सुधारने के लिए ब्लॉक मुख्यालयों पर चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ की संविदा पर नियुक्ति की गई। इसके लिए ठेके पर वाहन हायर किए गए। प्रत्येक ब्लॉक में एक-एक वाहन तैनात किया गया।
शासनादेश के तहत ये वाहन डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ विद्यालयों में जाएंगे और बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे। उन्हें रक्तअल्पता को दूर करने वाली दवाओं के साथ डि-वर्मिंग की गोली भी देंगे, ताकि बच्चों के पेट में कीड़े न पड़े।
इसके बावजूद यदि बच्चों की तबियत अधिक खराब दिख रही है तो उस बच्चे के मां-बांप को सूचित करने के साथ साथ जिला स्तर पर लाकर उसका इलाज कराएं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन वाहनों से बच्चों का इलाज कराने के बजाए अधिकारियों ने खूब सैरसपाटा किया है।
स्कूलों में कितनी टीमें गई। डॉक्टराें ने कितने बच्चों का इलाज किया। विद्यालयों में कितने बच्चे गंभीर हालत में पाए गए, जिनका इलाज जिला अस्पताल या फिर हायर सेंटर में कराया गया। इस बारे में अधिकारी कुछ भी बताने से कतरा रहे हैं। सीएमओ डा. प्रमोद कुमार ने बताया कि शासन से वाहनों से जुड़ी पत्रावलियां मांगी गई हैं। जिसे भेजा जाएगा।