अयोध्या। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में पिछले साल की तुलना में अबकी 7682 आवेदन घट गए हैं। इस बार परीक्षा के लिए 83,443 विद्यार्थियों ने ही आवेदन किया है। नकल के खिलाफ सख्ती के चलते परीक्षार्थियों की संख्या में कमी आई है।
कुछ समय पहले धड़ल्ले से बोर्ड परीक्षा में नकल करवाकर मोटी कमाई होती थी। पर डिप्टी सीएम ने 2017 में केंद्र निर्धारण के लिए ऑनलाइन व्यवस्था लागू की। जिसमें उन्हीं विद्यालयों को केंद्र बनाया गया, जिनमें सीसीटीवी कैमरे, बेहतर मार्ग, मानक के अनुरूप कमरे, शौचालय, पेयजल सहित तमाम मूलभूत सुविधाएं हों।
पहले वर्ष ही प्रयोग के तौर पर शुरू की गई इस व्यवस्था का नतीजा रहा कि अधिकांश बच्चों ने परीक्षा से किनारा कर लिया। सख्ती से हुई परीक्षा का असर रहा कि हमेशा लंबी संख्या में मिलने वाले नकलचियों की तादाद भी घट गई। इस बार डिप्टी सीएम ने बोर्ड परीक्षा को और हाईटेक कराने का फरमान पहले ही जारी किया है।
2018 में दोनों तरफ से कैमरे एवं वायस रिकॉर्डर की अनिवार्यता भी की गई। साथ ही पूर्व के दागी स्कूलों को केंद्र न बनाने का फरमान जारी किया। इनमें जो स्कूल ऑनलाइन व्यवस्था से केंद्र बने भी थे, भौतिक सत्यापन में उन्हें भी छांट दिया गया।
2017 में बोर्ड परीक्षार्थियों की संख्या एक लाख 16 सौ थी, जो घटकर 2018 में 91,125 पहुंच गई। इसमें हाईस्कूल के 50,339 एवं इंटर के 40,786 विद्यार्थी शामिल थे।
इस बार इस संख्या में और कमी आई है। डीआईओएस कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार 2019 की हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा के लिए 83,443 आवेदन आए हैं, जिनमें संस्थागत 82,327 एवं व्यक्तिगत 1116 आवेदन आए हैं। इनमें हाईस्कूल के 45,591 एवं इंटर के 37,852 परीक्षार्थी शामिल हैं।
बोर्ड परीक्षा फॉर्म और पंजीकरण में आधार अनिवार्य करने से फर्जी आवेदकों की संख्या में कमी आई है। अब दोनों तरफ से सीसीटीवी व वायस रिकार्डर सहित तमाम आधुनिक व्यवस्थाओं से पढ़ने वाले विद्यार्थी ही आवेदन कर कर रहे हैं। इसकी वजह से आवेदन में कमी आना स्वाभाविक है।
आरबी सिंह चौहान, जिला विद्यालय निरीक्षक, अयोध्या