अयोध्या। अपनत्व का प्रदर्शन और एकता की डोर मजबूत करने वाले रंगों के पर्व होली का रंग अब चटक हो गया है। गली-मोहल्लों व गांवों में फगुवा गीत गाए जाने लगे हैं। फगुवारे ढोल मंजीरे पर प्रेम और विरह के गीत गा रहे हैं।
वहीं, नगरों, बाजारों और गांवों में होलिका जलाने और रंग खेलने की तैयारियां हो रही हैं। जिले में कुल 2195 स्थानों पर होलिका दहन की तैयारी है। इसमें अयोध्या में 113, नगर कोतवाली क्षेत्र में 207, कैंट थाना क्षेत्र में 78 स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा। पुलिस ने भी सुरक्षा का खाका तैयार कर लिया है।
जिले में 2195 पर वसंत पंचमी को ही होलिका की रेड़ गाड़ी गई है, मंगलवार को होलिका दहन का मुहूर्त है। इसको लेकर तैयारियां जोरों पर है। बच्चों और युवाओं की टोलियां लकड़ी तलाशने और उठवाकर लाने की तैयारी में जुटी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लड़के-लड़कियां ‘एक नंद के लाल खेलैं होरी...’ जैसे होली गीत गाते हुए होलिका में खर (तिलेठी) डालने की तैयारी कर रहे हैं।
पं. देवनाथ बताते हैं कि कई स्थलों पर होलिका में भरभोलिए जलाने की भी परंपरा है। भरभोलिए गाय के गोबर से बने ऐसे उपले होते हैं, जिनके बीच में छेद होता है। इस छेद में मूंज की रस्सी डालकर माला बनाई जाती है। एक माला में सात भरभोलिए होते हैं।
होली में आग लगाने से पहले इस माला को भाइयों के सिर के ऊपर से सात बार घूमा कर फेंक दिया जाता है। रात को होलिका दहन के समय यह माला होलिका के साथ जला दी जाती है। इसका यह आशय है कि होली के साथ भाइयों पर लगी बुरी नजर भी जल जाए।
लकड़ियों व उपलों से बनी इस होली का दोपहर से ही विधिवत पूजन आरंभ हो जाता है। होलिका की आग में नई फसल की गेहूं की बालियों और चने के होले को भी भूना जाता है। इस दौरान ‘बरगदे कै लासा बंधवा पै...’ जैसे फूहड़ कबीरा भी गाया जाता है।
सीओ सिटी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि थानावार पीस कमेटियों की बैठक कर ली गई है। सभी होलिका दहन वाले स्थानों का थाना-चौकी पुलिस द्वारा निरीक्षण कर लिया गया है। सभी स्थानों पर एक-एक पुलिस व होमगार्ड के जवानों को तैनात किया जाएगा। साथ ही थाना व चौकी प्रभारी भी गश्त कर निगाह रखेंगे।