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मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ज्यादा रहा मतदान प्रतिशत

Tue, 28 Feb 2017 10:49 PM IST
फैजाबाद
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भदरसा में बूथ पर मतदान के लिए कतार में खड़ी मुस्लिम महिलाएं (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला
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विधानसभा चुनाव में मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत ज्यादा रहा। इसके संकेत क्या हैं, चुनाव परिणाम पर पड़ने वाले इसके प्रभाव पर मंथन किया जा रहा है। मुस्लिम मतों के किसी दल के पक्ष में ध्रुवीकरण पर भी निगाह है। जिले के पांच में से तीन विधानसभा क्षेत्रों में अन्य के मुकाबले ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं। 
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बात चुनावी परिदृश्य से शुरू करें। चुनाव प्रचार के दौरान अल्पसंख्यक वोटों पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की निगाह रही। बड़े नेता खुलकर इस पर बोल रहे थे। आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले के रुदौली विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक 70 हजार है।

इस विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक  62.43 फीसदी वोट डाले गए। दूसरे नंबर पर अयोध्या विधानसभा क्षेत्र है यहां इन वोटरों की संख्या लगभग 45 हजार है। यहां मतदान का प्रतिशत 61.72 रहा। तीसरे नंबर पर बीकापुर विधानसभा क्षेत्र है।
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यहां मुस्लिम समुदाय के वोटरों की संख्या लगभग 55 हजार है तो यहां मतदान 61.58 फीसदी रहा। मालूम हो कि जिले का औसत मतदान प्रतिशत 60.89 है। शेष बची दो सीटों, जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा नहीं हैं, वहां मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा। इनमें गोसाईंगंज में 60.38 तो मिल्कीपुर में 58.33 फीसदी ही मतदान हुआ।


राजनीतिक विश्लेषक इन विधानसभा क्षेत्रों में मतदान के बढ़े रुझान के कई कारण मान रहे हैं। पहला तो सपा और बसपा के बड़े नेताओं का इन पर फोकस किया जाना। वोटों की छीना-झपटी के कारण प्रत्याशियों ने वोटरों को बूथों तक ले जाने की मुकम्मल व्यवस्था की थी।

रुदौली में सपा और बसपा दोनों ने अल्पसंख्यक प्रत्याशी उतारे थे। दोनों का फोकस वोटरों का वोट कास्ट करवाने पर रहा। यही स्थिति बीकापुर में भी रही। यहां सपा और बसपा प्रत्याशी में इन वोटों को लेकर मोर्चेबंदी रही।

अयोध्या में सपा के परंपरागत वोट रहे इन वोटरों के लिए बसपा ने नया पासा फेंक दिया और इसी समुदाय से प्रत्याशी देने से भी वोट कास्टिंग ज्यादा होने का आंकलन है। अमूमन इस समुदाय के ज्यादा वोटरों की निगाह प्रतिद्वंद्वी भाजपा को हराना होता है।

इस बार पहले की अपेक्षा इसकी स्थिति बेहतर होना भी इसका कारण रहा। चुनाव के अंतिम चरण में कई क्षेत्रों में मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण हुआ। कहीं सपा प्रत्याशी के पक्ष में तो दूसरे स्थानों पर बसपा के पक्ष में भी ध्रुवीकरण हुआ। यह स्थिति रुदौली, बीकापुर और अयोध्या तीनों स्थानों पर रही। स्थानीय कारण भी हैं। 
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