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मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन के लिए जमकर हंगामा

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अयोध्या। मेडिकल कॉलेज दर्शननगर में कोरोना मरीजों का हाल बुरा है। कड़ी मशक्कत के बाद मरीज भर्ती हो गया तो सुविधाओं का अकाल उसकी जान पर भारी पड़ रहा है।
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ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए यहां बुधवार को भी सुबह से सिलेंडर के लिए लाइन लगाए तीमारदारों का धैर्य टूटा तो उन्होंने जमकर हंगामा काटा। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने अस्पताल की बदहालियों का एक-एक कर खुलासा किया और आरोप लगाया कि सिलेंडर पहुंच तो रोज रहे हैं, लेकिन कहां जा रहेा हैं पता नहीं।
घंटों हंगामे के बाद अस्पताल प्रशासन आगे आया और किसी तरह परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया गया। 200 बेड के कोविड एल-2 अस्पताल बनाए गए राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर महज 120 मरीजों के इलाज में हांफता नजर आ रहा है।
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एक तो यहां मरीजों को भर्ती कराना किसी किले को जीतने से कम नहीं है। इसके बाद यदि मरीज भर्ती हो भी गया सुविधाओं को लेकर मारामारी की स्थिति है। ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए शुरू हुआ हाहाकार एक सप्ताह से भी कम नहीं हो रहा है।
जबकि, मेडिकल कॉलेज प्रशासन प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में सिलेंडरों की आपूर्ति होने का दावा कर रहा है। ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए यहां तीमारदार दो दिन से पर्ची लिए लाइन में घंटों खड़े हो रहे हैं, लेकिन सिलेंडर नहीं मिलने से मरीजों का बुरा हाल हो रहा है।
सिलेंडर के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे तीमारदारों के सब्र का बांध बुधवार को टूट गया और अस्पताल के सामने ही मरीजों के परिजनों ने खूब हंगामा काटा। तीमारदार अपने हाथ में पर्ची लिए सुबह छह बजे से लाइन लगाए थे, लेकिन सिलेंडर नहीं मिल सका।
हंगामा शुरू हुआ तो एसडीएम सदर भी मौके पर पहुंचीं और तीमारदारों को थोड़ी देर में ही ऑक्सीजन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। फिर करीब दो घंटे तक तीमारदार तीन अलग-अलग जगहों पर इसके लिए लाइन में खड़े हुए, लेकिन ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिला तो लोग आक्रोशित हो गए।
तीमारदारों ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर कई आरोप लगाए। बताया कि ऑक्सीजन सिलेंडर तो रोज आ रहे हैं, लेकिन कहां जा रहे हैं पता नहीं। तमाम मरीजों की इसके अभाव में मौत हो चुकी है।
घंटों हंगामे का दौर चला तो प्रिंसिपल डॉ. विजय कुमार दल-बल के साथ पहुंचे और तीमारदारों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने का आश्वासन देकर शांत कराया।
हंगामा कर रहे तीमारदार मोहम्मद तहा ने बताया कि ओपीडी में सिलेंडर रखा रहता है, लेकिन जो पहुंच वाले लोग हैं, उन्हें ही सिलेंडर दे दिया जाता है। रात में ही करीब सात-आठ मरीजों की ऑक्सीजन के अभाव में मौत हो गई। पांच बेड अभी खाली हो गए। वीरेंद्र पांडेय ने बताया कि सुबह चार बजे गाड़ी आई, वह सिलेंडर कहां गए, किसी को पता नहीं है।
मेरे बाबाजी भर्ती हैं, ऑक्सीजन के लिए कल लाइन लगाए रहे, रात में एक बजे तक गैस नहीं मिली तो रिजेक्ट सिलेंडर में से ढूंढकर सिलेंडर निकाला। बाद में सिलेंडर को लेकर लूट मची, जो जितना सिलेंडर पाया, लेकर चला गया।-लकी, कौशलपुरी
माताजी भर्ती हैं, उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत है। जिसके लिए सुबह छह बजे से लाइन में लगे। चार बार दौड़ाया गया, कल की पर्ची से अभी तक सिलेंडर तक नहीं मिला है। कल सिलेंडर आया तो उसे गायब कर दिया गया। यहां से सिलेंडर ब्लैक किए जा रहे हैं। -वीरेंद्र पांडेय, मसौधा
मेरा भाई पांच दिन से भर्ती हैं। एक दिन सिलेंडर सही से नहीं मिला है। न डॉक्टर आते हैं न दवाएं मिल रही हैं। इतनी गंदगी है कि 10 मिनट खड़ा नहीं हो सकते। एसडीएम ने सिलेंडर देने का वादा किया था, दो घंटे हो गए लेकिन सिलेंडर नहीं मिला।-मोहम्मद तहा, सहादतगंज
सुबह से लाइन लगी है, मरीज को सांस फूूल रही है, लेकिन सिलेंडर नहीं मिल रहा है। तीन जगह लाइन लगवाया जा चुकी है। सुबह सिलेंडर की गाड़ी भी आई थी, लेकिन सिलेंडर नहीं मिला। सारे सिलेंडर कहां चले गए पता नहीं। -राममूूरत तीमारदार
कल से सिलेंडर नहीं मिला है। पर्ची दी गई हैं। प्रशासन सिलेंडर नहीं दिलवा रहा है। जो पहुंच वाले लोग हैं उन्हें सिलेंडर मिल जाता है, लेकिन हम लोग घंटों बैठने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। -मालती सिंह, तीमारदार
जब ऑक्सीजन सिलेंडर से भरा वाहन पहुंचता है तो कुछ तीमारदार बदमाशी करते हुए सिलेंडर लूट ले रहे हैं। कई-कई मरीज तीन-चार सिलेंडर तक रखे रहते हैं। व्यवस्था सुधारने का इंतजाम किया जा रहा है। कल से सभी तीमारदारों तक आसानी से सिलेंडर पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।-डॉ. विजय कुमार, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज, दर्शननगर
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