अयोध्या। हनुमानगढ़ी ने एक बार फिर से पटना के महावीर मंदिर पर अपने स्वामित्व का दावा किया है। इससे पहले भी हनुमानगढ़ी महावीर मंदिर पर स्वामित्व का दावा करता रहा है। हनुमानगढ़ी के संतों ने बृहस्पतिवार को एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा है कि महावीर मंदिर पटना हनुमान गढ़ी की संपत्ति है। सदियों से इस मंदिर पर उसका मालिकाना हक रहा है। संतों ने पूर्व आईपीएस किशोर कुणाल पर मंदिर पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाते हुए उनकी संपत्ति की जांच ईडी व सीबीआई से कराने की मांग की है।
हनुमानगढ़ी की ओर से नियुक्त पटना महावीर मंदिर के महंत महेंद्र दास ने बताया कि पटना महावीर मंदिर 350 वर्ष पूर्व श्रीरामानंदीय वैरागी संप्रदाय के जगद्गुरू स्वामी बालांनद द्वारा स्थापित है। सदियों से यहां हनुमानगढ़ी की परंपरा ही प्रवाहमान रही है। आरोप लगाया कि इस मंदिर पर पूर्व आईपीएस किशोर कुणाल ने कब्जा करके रामानंदीय परंपरा को नष्ट करने का प्रयास किया है। उन्होंने किशोर कुणाल पर मंदिर की संपत्ति से निजी संपत्ति खड़ी करने का भी आरोप लगाया।
निर्वाणी अनी अखाड़ा के पूर्व महामंत्री महंत माधव दास ने कहा कि किशोर कुणाल की संपत्ति की जांच ईडी व सीबीआई से कराई जानी चाहिए। कहा कि महावीर मंदिर हनुमानगढ़ी की सपंत्ति है, सप्रेम वापस कर दें। ऐसा न होने पर हजारों नागा साधु पटना पहुंचकर मंदिर के सामने धरना देंगे। स्वयं को पटना महावीर मंदिर का परमाचार्य बताने वाले महंत बाबा रघुनाथ दास ने कहा कि महावीर मंदिर पर सदियों से हनुमानगढ़ी का ही पुजारी रहा है। इस दौरान संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास, महंत सरोज दास, पहलवान मनीराम, पहलवान गदाधर दास सहित अन्य नागा साधु मौजूद रहे।
हनुमानगढ़ी का दावा बेबुनियाद, आज आएगा फैसला
किशोर कुणाल का कहना है कि हनुमानगढ़ी के दावे में कोई दम नहीं है। धार्मिक न्यास बोर्ड में इनके द्वारा जो अपील की गई थी, उसका शुक्रवार को फैसला आने वाला है। फैसले के साथ ही दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। अपने स्वामित्व से संबंधित ये कोई भी दस्तावेज बोर्ड में नहीं प्रस्तुत कर सके हैं। उन्होंने कहा कि महावीर मंंदिर के स्वामित्व काे लेकर पटना उच्च न्यायालय द्वारा पहले से ही स्पष्ट किया जा चुका है कि यह हनुमानगढ़ी से स्वतंत्र एक अलग धार्मिक संस्था है। कहा कि जो स्वयं को पटना मंदिर का परमाचार्य बता रहे हैं, उनका भी कोई अधिकार नहीं बनता है।