राममंदिर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक संपन्न हो गई। बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के समक्ष कार्यदायी संस्था ने प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की है। संस्था ने अनुमान जताया है कि मंदिर का भूतल जिसमें रामलला विराजेंगे वह अप्रैल 2023 तक पूरा हो जाएगा। इसके लिए ट्रस्ट की नियमावली पर भी मुहर लग गई है। दिसंबर से परकोटे का भी निर्माण शुरू हो जाएगा।
मंदिर निर्माण समिति की बैठक इस बार दोनों दिन रामजन्मभूमि परिसर स्थित एलएंडटी कार्यालय में हुई। बैठक के बाद मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सुग्रीव किला से रामजन्मभूमि तक निर्माणाधीन मार्ग का भी निरीक्षण किया और कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि इंजीनियरों ने अनुमान जताया है कि मंदिर का भूतल, जहां रामलला विराजमान होंगे वह अप्रैल 2023 तक तैयार हो जाएग, भूतल का स्ट्रक्चर खड़ा हो जाएगा। इसके बाद फिनिशिंग का काम चलता रहेगा।
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बैठक में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की नियमावली पर भी मुहर लग गई है। इस पर छह महीने से काम चल रहा था, क्या नियम व कायदे होंगे, इस पर अंतिम मुहर लग गई है। चंपत राय ने बताया कि रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के एकाउंट का डिजिटलाइजेशन भी किया जाना है। डोनेेशन, मैनेजमेंट सिस्टम, अन्य आवश्यकताएं आनलाइन हो सकें, इसलिए डिजिटलाइजेशन किया जा रहा है। इस कार्य को टीसीएस ने अपने हाथ में ले लिया है, उनके साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर हो गए हैं।
चंपत राय ने बताया कि दिसंबर से मंदिर के 800 मीटर लंबे परकोटे का भी निर्माण शुरू हो जाएगा। परकोटे में छह मंदिर होंगे। एक में भगवान राम के पूर्वज सूर्य भगवान सात घोड़ों के द्वारा खींचे जा रहे रथ पर सवार रहेंगे। गणपति, भगवती, शंकर व हनुमान जी का भी स्थान रहेगा। उत्तर दिशा में भगवान राम की जहां रसोई होगी वहां माता अन्नपूर्णा की मूर्ति स्थापित की जाएगी।
वैज्ञानिक तय करेंगे अचल मूर्ति की ऊंचाई
चंपत राय ने बताया कि गर्भगृह में रामलला की अचल मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भी चर्चा हुई। भगवान श्रीराम की मूर्ति ऐसे हो जो भक्तों की भावनाओं के अनुरूप हो। भगवान के नेत्र व चरण भक्तों को दिखने चाहिए, इस पर भी चर्चा हुई है। कहा कि मूर्ति श्याम रंग की हो, इस पर विचार हुआ है। मूर्ति की ऊंचाई वैज्ञानिकों की राय से तय की जाएगी ताकि रामनवमी के दिन दोपहर 12 बजे सूर्य देवता बालक राम के मस्तक को प्रकाशित कर सकें।
कुबेर टीला पर लगेगी जटायु की मूर्ति
राममंदिर के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि मंदिर में माता शबरी के साथ अहिल्या बाई का भी मंदिर बनाने का निर्णय हुआ है। परिसर में महर्षि बाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, माता शबरी और अहिल्या बाई और जटायु की मूर्ति लगेगी। जटायु का मंदिर कुबेर टीला पर स्थापित किया जाए, ऐसा सुझाव आया है। परिसर में गोस्वामी तुलसीदास का भी मंदिर बनाने पर सहमति बन गई है।
आधुनिक होगी राममंदिर की प्रकाश व्यवस्था
डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर की प्रकाश व्यवस्था आधुनिक होगी। दिन में मंदिर की प्रकाश व्यवस्था कैसी हो और रात में कैसी प्रकाश व्यवस्था हो इसका प्रारूप तैयार करने का निर्देश नृपेंद्र मिश्र ने संस्था को दिया है। प्रकाश व्यवस्था के लिए देश के बड़े मंदिरों सहित संसद व राष्ट्रपति भवन की प्रकाश व्यवस्था का भी अध्ययन हमारी टीम कर रही है। इसके बाद प्रारूप ट्रस्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।