फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जगन्नाथ मंदिर व राम कचहरी से निकली भव्य रथयात्रा

विज्ञापन
विज्ञापन
अयोध्या। कोरोना के चलते रामनगरी में लगातार दूसरे वर्ष भगवान जगन्नाथ का रथयात्रा महोत्सव प्रभावित रहा। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की दितीया को रामनगरी के दर्जनों मंदिरों से रथयात्रा निकाली की परंपरा रही है।
विज्ञापन

जिसमें भगवान के स्वरूप के साथ भक्त भी शामिल होते हैं। इस वक्त जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के अवसर पर कुछ मंदिरों से रथ यात्रा निकाली गई, तो कुछ मंदिरों ने कोरोना के कारण रथ यात्रा निकालने से परहेज किया।
राम जन्मभूमि परिसर से सटे प्राचीन जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा महोत्सव की परंपरा का निर्वहन भव्यता पूर्वक किया गया। इसके अलावा मणिराम दास की छावनी व राम कचहरी मंदिर से भव्य यात्रा निकाली गई।
विज्ञापन

जबकि दशरथ महल, रामहर्षण कुंज सहित अन्य मंदिरों ने अपने मंदिर परिसर में ही प्रतीकात्मक यात्रा निकालकर रथयात्रा की परंपरा का निर्वहन किया।
रामजन्मभूमि परिसर से सटे जगन्नाथ मंदिर के महंत राघव दास ने बताया कि परंपरा है कि यदि जगन्नाथ भगवान को रथ पर आरूढ़ नहीं कराया जाएगा तो उनकी पुर्नप्रतिष्ठा करनी पड़ेगी, जो कि संभव नहीं है।
इसलिए मंदिर परिसर से रथपर भगवान जगन्नाथ को आरूढ़ कर गाजे बाजे के साथ रथयात्रा निकाली गई। जो परंपरागत मार्गों से होते हुए सरयू तट पहुंची। जहां पूजन अर्चन के बाद वापस मंदिर पहुंचकर रथ यात्रा का समापन हुआ।
देर रात जगन्नाथ भगवान की फूल बंगला झांकी भी सजाई गई। इससे पूर्व मंदिर में भगवान जगन्नाथ का औषधि, दूध, दही, घी व गंगाजल से अभिषेक किया गया।
महंत राघव दास ने बताया कि भगवान जगन्नाथ के प्राण स्वरूप स्थापित भगवान शालिग्राम को भी भगवान की नाभि से निकाल करके स्नान कराया गया।
रामकचहरी मंदिर के महंत शशिकांत दास ने बताया कि मंदिर से भव्यता पूर्वक रथ यात्रा निकाली गई। इससे पहले मंदिर में विराजमान भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना की गई।
कई मंदिरों से निकली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का दर्शन भक्त निहाल हो उठे। भक्तों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर जगन्नाथ भगवान के चरणों में श्रद्धा निवेदित की। यात्रा के दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें