अयोध्या। गणेश चतुर्थी पर्व शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। इसी दिन से ही दस दिवसीय गणेशोत्सव का भी शुभारंभ हो गया। इस बार कोरोना के चलते शहर में कहीं भी पंडाल नहीं सजाए गए हैं। मंदिरों व घरों में ही भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना का क्रम प्रारंभ किया गया है। गणपति बप्पा मोरया... घर में पधारो गजानन जैसे उद्घोष व गीतों के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा घरों में स्थापित की गई।
नगर में 10 दिन तक गणेशोत्सव का उल्लास सीमित आयोजनों के मध्य रहेगा। शहर में 80 स्थल पर पंडालों में प्रतिमाओं की स्थापना कर गणेशोत्सव मनाया जाता था, लेकिन इस वर्ष कोरोना की गाइडलाइन के चलते प्रशासन ने प्रतिमा स्थापना की अनुमति नहीं दी है। जिसके चलते भक्तों ने घरों में ही गणेश जी की छोटी प्रतिमाओं की स्थापना कर पूजा-अर्चना प्रारंभ कर दी है।
गणेशोत्सव को लेकर बाजार में गणेश जी की छोटी प्रतिमाओं की डिमांड भी अधिक रही। घरों में भक्तों ने विघ्नहर्ता की प्रतिमा की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना प्रारंभ कर दी है। आज से दस दिन तक गणेश प्रतिमा का नित्य सुबह व शाम पूजन किया जाएगा। टकसाल निवासी गोपाल जायसवाल हर वर्ष गणेश उत्सव धूमधाम से मनाते हैं। बताया कि इस वर्ष कोरोना के चलते सीमित अनुष्ठानों के बीच परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। घर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर दस दिन तक पूजन, आरती, राग-भोग चलता रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल्या नंदन वर्धन के अनुसार भगवान गणपति को मोदक प्रिय है। पूजन के समय मोदक का भोग अवश्य लगाएं। अगर संभव न हो तो मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं। पीले वस्त्र पर स्वस्तिक बनाकर उस पर भगवान श्रीगणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। फिर पंचोपचार व षोडशोपचार पूजन करें। भगवान गणेश जी को विशेष रूप से दूब चढ़ाएं, घी का दीपक जलाएं। मोदक, पंचमेवा व पांच फलों का भोग लगाएं। नारियल, तांबूल व कमल गट्टा, सुपारी सहित लौंग व इलायची भी अर्पित करनी चाहिए।