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दीये जलाने के लिए खरीदना होगा महंगा तेल

Tue, 03 Nov 2015 11:23 PM IST
फैजाबाद/अमरउजाला ब्यूरो
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सूत्रों के अनुसार बीते साल दीपावली में अरहर की दाल 50 से 65 रुपये किलो थी। दो सौ के पार पहुंची दाल अब 130 रुपये किलो पर पहुंची है तो भी लोगों को काटने दौड़ रही है। कडुआ तेल तो दीपावली में लोगों के तेल निकालने को आमादा है। 65-70 रुपये लीटर में बिका तेल इस दीपावली में इन दिनों 130 रुपये लीटर पहुंच गया।
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कड़ुवा तेल का दाम बढ़ाने में जमाखोरों का हाथ बताया जा रहा है, फसल बर्बाद होना बताकर दुकानदार मनमाना दाम बढ़ाते जा रहे हैं। दस दिन पहले कडुआ तेल 110-115 रुपये लीटर था। आज थोक में इसका मूल्य 118 से 120 रुपये प्रति लीटर है।

जिला पूर्ति कार्यालय दाल की तरह तेल और सरसों के जमाखोरों के साथ कदमताल कर रहा है। फतेहगंज में तेल की आपूर्ति बरेली से दो ब्रांडों बैल कोल्हू और तुलसी के रूप में होती है। इसके 15 लीटर तेल डिब्बे का मूल्य 1750 रुपये पर पहुंच गया है। बाजार में इसका खुला भाव 130 रुपया लीटर पहुंच गया है।
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वहीं पीएम के अनुरोध से कुम्हारों को आशा है कि इस बार उनके दीये पिछले वर्ष के सापेक्ष अधिक बिकेंगे। मझवा, कुम्हारन टोला लालबाग, मवई के संतोष, राधेश्याम, बृजेश प्रजापति, रामटहल, रामवीर, राम लखन, रामसरन, लल्लू, भोलई और अच्छेलाल कहते हैं सभी लोगों ने दीये पिछले वर्ष से ज्यादा बनाया है। लगता है कि दीये की मांग बढ़ेगी। इस बार सुनने में आ रहा है कि लोग दीये का प्रयोग करेंगे, इसलिए ज्यादा दीये बना रहे हैं।

बाजार में चायनीज झालरों की दस्तक
इस बार दीपावली में रोप लाइट, फूलबत्ती, दीपक लाइट, पाइप लाइट, पत्ती लाइट, मिर्ची लाइट समेत विभिन्न प्रकार की झालरें व लाइटें दुकानों पर आ गई हैं। बीते वर्ष इनकी कीम 25-35 रुपये लड़ी थी। इस बार 35 से 50 तक हो गई है। ओम, लक्ष्मी-गणेश व स्वास्तिक के आकार की लाइटें भी लुभा रही हैं। अभी ग्राहक रेट की तहकीकात कर रहा है। व्यवसाई प्रकाश जायसवाल ने कहा कि बीते साल की तुलना में झालरों की कीमतों में 20-22 फीसदी की मूल्य वृद्धि हुई है।

पटाखों के दामों में बेतहाशा वृद्धि
पटाखा बेंचने का कोई लाइसेंसी न होने से इस बार इसके मूल्य में बेतहाशा वृद्धि के संकेत हैं। सीको, मुन्ना, जलेबी, महताब, अनार, रंगीन छुरछुरिया, राकेट, लहसुन, सुतली पटाखा पांच से बीस रुपये पैकेट व प्रति मिल जाते थे। नरेंद्रालय रिकाबगंज में पिछले साल दुकान लगा चुके भोलू ने बताया कि इस बार इनके दस से चालीस रुपये तक बिकने की उम्मीदें हैं।

सरसों की फसल बर्बाद हो चुकी है। मांग के सापेक्ष उत्पादन व उपलब्धता कम है। तेल की सप्लाई बढ़ जाये तो दाम स्वत: कम हो जायेंगे। तेल की क्राइसिस होने से दाम बढ़ रहे हैं।
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-संतोष विक्रम शाही, जिला पूर्ति अधिकारी, फैजाबाद।
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