सदन में 41 फीसदी सदस्य ऐेसे हैं जिनकी पढ़ाई हाईस्कूल तक है। इनमें निरक्षर सदस्यों के साथ ही पांच प्राइमरी तक, पांच जूनियर और दो हाई स्कूल, नौ इंटर, नौ स्नातक, सात परास्नातक, एक पीएचडी तक शिक्षा प्राप्त सदस्य हैं। जिले की सबसे बड़ी पंचायत का काम जिले के लोगों के लिए नीतिपरक फैसले लेना है। विकास के विभिन्न आयामों पर चर्चा के बाद इसके निर्धारण की जिम्मेदारी भी इन पर है।
जिले के विकास के लिए परियोजनाएं बनाने से इनके संचालन और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए कर लगाने वसूली करने का अधिकार भी त्रिस्तरीय पंचायत की व्यवस्था में बताया जाता है। इसके लिए पंचायत में पढ़े लिखे और अनुभवी सदस्यों की जरूरत है लेकिन इस बार के सदन का परिदृश्य इस लिहाज से बेहतर नहीं माना जा रहा है।
43 सदस्यीय जिले की पंचायत में इस बार आधे सदस्य हाईस्कूल की शिक्षा वाले हैं। हाल यह है कि विभिन्न दलों की राजनीति और अपने सियासी प्रभाव के बल पर लोगों को अपने साथ जोड़ने वाले कई चेहरे ऐसे है जिनकी शैक्षिक योग्यता महज हाई स्कूल है।
ऐसे लोगों में पूरा बाजार और मसौधा के साथ ही मवई क्षेत्र के ऐसे पुरुष सदस्य है जिनमें दो तो जूनियर हाईस्कूल तक शिक्षित हैं जबकि एक इंटर पास हैं। इसी तरह एक जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठ चुकी महिला की शैक्षिक योग्यता भी महज जूनियर तक है।
पंचायत के कुल 43 सदस्यों में एक पीएचडी, सात परास्नातक, नौ स्नातक, नौ इंटर, दो हाईस्कूल, पांच जूनियर, पांच प्राइमरी, पांच निरक्षर शामिल हैं। हालांकि अतीत में जिले की पंचायत के लिए चुने गए सदस्यों से नीतिपरक फैसले कभी कभार ही लिए गए।
खास बात यह भी है कि निरक्षरों की इस तादात में पांच में से चार पुरुष हैं।
केवल एक महिला निरक्षर है। इसी तरह जिले की पंचायत में जीत कर आई 16 महिला सदस्यों में से सबसे डिग्री धारी महिला ही हैं। इनमे चार महिला सदस्य ऐसी हैं जो इंटर तक शिक्षित हैं शेष सभी नौ स्नातक की श्रेणी में हैं।