शारदा सहायक नहर से निकलने वाली चांदपुर माइनर दो बार कटने के बाद इसकी सफाई व्यवस्था की पोल खुल गई। सिड़हिर के पास नहर कटी तो गांव में पानी भर गया। इससे माइनर की टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। बीती रात माइनर में उफनाकर बहने वाले पानी को रोकने के लिए इसे समदा झील में बहाया जा रहा है।
माइनर चांदपुर पुर रजबहा चिर्रा से निकलकर सिड़हिर, पोरा, छतिरवा, विकास नगर, मिर्जापुर निमोली, दोस्तपुर, नैपुरा, कल्यान भदरसा, भरतकुंड, बीबीपुर होते हुए तमसा नदी में गिराया गया है। नहर से लगभग छह किमी. की दूरी पर ही सिड़हिर गांव के पास माइनर कट गई।
दोबारा बांधे जाने के बाद बीती रात पानी का चढ़ाव कुछ इस तरह हुआ कि दुरुस्त किया गया बंधा फिर रिसकर बहने लगा। गांव में फिर पानी घुसने की आशंका में इस पानी को समदा झील की ओर मोड़ने के लिए पूरे पयासी गांव के पास कटवा दिया गया।
पानी के बहाव को कम किया गया। अब तक यह पानी ऊपर से बह रहा है। दूसरी ओर लगभग 26 किमी. की माइनर में लगभग 17 किमी. नेपुरा के बाद थोड़ा सा पानी भी नहीं पहुंच रहा है। माइनर सूखी पड़ी है जबकि विभाग के जेई का कहना है कि इस माइनर की सफाई की गई है।
आसपास के लोगों का कहना है कि माइनर की सफाई न होने से आगे पानी नहीं पहुंच रहा है। सफाई न होेने के कारण माइनर के हेड की ओर किनारे के ऊपर से पानी बह रहा है और टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
खास बात यह भी है कि भरतकुंड दौरे के समय डीएम ने भी इस माइनर को सफाई करवाकर पानी सरोवर में लाने का निर्देश दिया था। इसी माइनर की सफाई के लिए छतिरवा, पोरा निवासी दिवाकर पांडेय ने प्रमुख सचिव सिंचाई, डीएम और चीफ इंजीनियर को पत्र भी भेजा था।
जेई रवींद्र सिंंह का कहना है कि माइनर की सफाई की व्यवस्था की गई थी लेकिन उन्होंने अभी देखा नहीं है। साथ ही बताया कि माइनर से पानी रिसने के कारण उसे समदा झील की ओर मोड़ा गया है। नायब तहसीलदार पैगाम हैदर का कहना है कि माइनर की बैंक को मजबूत किया जा रहा है। माइनर की टेल तक पानी न पहुंचने के बारे में जानकारी नहीं है।