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बाहर से दवाएं मंगाने पर सीएमएस सख्त, कराया एफआईआर

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अयोध्या। जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए आ रहे मरीजों से मेडिकल स्टोर से दवाएं मंगाने के मामले पर सीएमएस ने सख्ती दिखाई है। बृहस्पतिवार को हुए इस प्रकरण में अज्ञात के विरुद्ध केस दर्ज कराते हुए सीएमएस ने आरोपी फार्मासिस्ट, वार्डब्वॉय व स्वीपर का पटल परिवर्तित कर दिया है। जबकि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी भी गठित की है।
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जिला अस्पताल में इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों को बाहर से कमीशन युक्त दवाएं व इंजेक्शन मंगवाकर लगाने का मामला आम है। इसके लिए कुछ निजी कर्मचारी भी बिना किसी वेतन के इमरजेंसी में डेरा जमाए नजर आते हैं। यहां इमरजेंसी में गंभीर रूप से पहुंचने वाले मरीज प्रतिदिन इसका शिकार होते हैं।
बीते वर्ष जिलाधिकारी अनुज कुमार झा के निरीक्षण में हुई फजीहत के बाद पर्ची सिस्टम तो बंद हो गया, लेकिन इस गोरखधंधे पर लगाम नहीं लगी। पर्ची न लिखकर डॉक्टरों ने बाहर के मेडिकल स्टोर को सीधे सेट कर लिया। मरीज व तीमारदारों को सीधे संबंधित मेडिकल स्टोर पर भेजकर दुकानदार को फोन कर दिया जाता रहा। बृहस्पतिवार को ऐसा ही एक मामला उजागर हुआ तो डॉक्टर व कर्मचारियों की दोबारा किरकिरी हुई।
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ललिता दूबे नामक एक महिला को सांप डसने के बाद परिवारीजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पर मौजूद स्टाफ ने तीमारदार को बाहर एक मेडिकल स्टोर पर भेजा और करीब सात सौ के इंजेक्शन मंगवा लिया। बाद में तीमारदार ने जिला प्रशासन ने मामले की शिकायत की तो सीएमएस को कार्रवाई का निर्देश दिया गया। साथ ही औषधि निरीक्षक पीसी रस्तोगी ने मेडिकल स्टोर पर जाकर जांच पड़ताल किया। इसके बाद सीएमएस डॉ. रवींद्र कुमार ने सख्ती बरती और प्रकरण में अज्ञात के विरुद्ध केस दर्ज कराया है।
सीएमएस डॉ. रवींद्र कुमार ने बताया कि उस समय ड्यूटी पर तैनात फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वॉय व स्वीपर का पटल परिवर्तित कर दिया गया है। साथ ही मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित गई है। जिसमें चिकित्सा अधीक्षक डॉ सत्येंद्र सिंह, बेहोशी के चिकित्सक डॉ. सुरेश पटारिया व डॉ. रजत चौरसिया शामिल है। बताया कि मामले की जांच कर तीन दिन के अंदर आख्या मांगी गई है। दोषी चिकित्सक व संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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